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Tuesday, February 3, 2026
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उत्तर प्रदेश में संस्कृत शिक्षा को मिली नई उड़ान, 73 नए संस्कृत महाविद्यालयों को मान्यता प्रदान की, पढ़िए खबर

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  • 73 नए महाविद्यालयों को मिली मान्यता।

UP Sanskrit: नए संस्कृत महाविद्यालयों की स्थापना से विशेष रूप से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को संस्कृत शिक्षा प्राप्त करने का सशक्त अवसर मिलेगा। यूपी में योगी सरकार ने संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए 73 नए संस्कृत महाविद्यालयों को मान्यता प्रदान की है। साथ ही रोजगारपरक शिक्षा को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद ने चार नए डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की शुरुआत भी की है। वर्तमान में प्रदेश के 184 संस्थानों में इन पाठ्यक्रमों के अंतर्गत प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

 

सीएम योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में सरकार ने संस्कृत भाषा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। नए महाविद्यालयों की स्थापना से विशेष रूप से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को संस्कृत शिक्षा प्राप्त करने का सशक्त अवसर मिलेगा। इससे न केवल उनकी शैक्षणिक क्षमता का विकास होगा, बल्कि उनके करियर को भी नई दिशा मिलेगी।

यूपी में संस्कृत भाषा को मिलेगा बढ़ावा: संस्कृत भाषा सिर्फ धार्मिक और आध्यात्मिक ग्रंथों की भाषा नहीं, बल्कि यह भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा का आधार रही है। संस्कृत देश की कई भाषाओं की जननी रही है लेकिन, अब यह भाषा रोजगार का भी माध्यम बन रही है। योगी सरकार द्वारा शुरू किए गए डिप्लोमा पाठ्यक्रम छात्रों को व्यावसायिक योग्यता प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस कदम से लोग हमारी सांस्कृतिक धरोहर से भी जुड़ सकेंगे।

माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के सचिव शिव लाल ने बताया कि सरकार के इन प्रयासों से प्रदेश के युवाओं को संस्कृत के क्षेत्र में रोजगार की नई संभावनाएं मिलेंगी। इन डिप्लोमा कोर्सों से प्रशिक्षण प्राप्त कर छात्र अध्यापन, शोध, अनुवाद, सांस्कृतिक प्रचार-प्रसार सहित कई क्षेत्रों में अपने भविष्य को संवार सकेंगे। अब तक संस्कृत भाषा की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए सीमित संख्या में ही रोज़गार के अवसर प्राप्त हो पाते थे। लेकिन, इस पहल के बाद अब संस्कृत भाषा का देश में और प्रचार और प्रसार संभव हो सकेगा।

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