नई दिल्ली: देश के कई राज्यों में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं. तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल, असमऔर पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनाव के लिए कांग्रेस ने तैयारी शुरू कर दी है और स्क्रीनिंग कमेटी बनाई है. ऐसा हर बार होता है और यह रूटीन प्रक्रिया है. हालांकि इस बार प्रियंका गांधी को असम की स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्ष होंगी. ऐसा पहली बार है जब गांधी परिवार से किसी राज्य की स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है. इस कमेटी का काम होता है विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों का चयन करना. राज्य की हर विधानसभा से जो भी नाम आएंगे, उसमें से सबसे बेहतर उम्मीदवार का चयन कर उसे एक, दो, तीन की वरीयता में डाल कर कांग्रेस के केंद्रीय चुनाव समिति के सामने रखना. उम्मीदवारों के इस पैनल पर अंतिम फैसला कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति लेती है.
असम की इस स्क्रीनिंग कमेटी में प्रियंका गांधी के साथ दो अन्य सदस्यों के अलावा इमरान मसूद भी हैं, जो सहारनपुर से कांग्रेस के सांसद हैं. हालांकि सबसे दिलचस्प बात ये है कि इन्हीं इमरान मसूद ने ठीक दस दिन पहले प्रियंका गांधी को लेकर एक बयान दिया था जो काफी सुर्खियों में रहा था. इमरान मसूद ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के सवाल पर कहा था कि बनाइए प्रियंका गांधी को प्रधानमंत्री वो इंदिरा गांधी की तरह बांग्लादेश को जवाब देंगी, वो इंदिरा गांधी की पोती हैं. इमरान मसूद के इस बयान पर काफी बवाल हुआ था और इसके कई मायने निकाले गए थे. अब इमरान मसूद को प्रियंका गांधी की टीम में ही जगह दी गई है.
प्रियंका गांधी को क्यों दिया असम का जिम्मा?
अब सवाल उठता है कि प्रियंका गांधी को असम के स्क्रीनिंग कमेटी का जिम्मा क्यों दिया गया है और क्या इसके पीछे भी सोची समझी रणनीति है. असम के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई भी युवा हैं, उनके पिता तरुण गोगोई कई बार असम के मुख्यमंत्री रहे और 10 जनपथ के करीबी थे. गौरव गोगोई लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता हैं यानी राहुल गांधी के बाद कांग्रेस संसदीय दल में उनकी हैसियत नंबर 2 की है. गौरव गोगोई, सचिन पायलट, जीतू पटवारी जैसे नेताओं को कांग्रेस की नई पीढ़ी के नेताओं के रूप में देखा जा रहा है. ऐसे में प्रियंका गांधी को गौरव गोगोई के मददगार के रूप में देखा जा रहा है.