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Monday, January 12, 2026
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जनसंख्या नियंत्रण को शीघ्र बनाया जाए कानून, पढ़िए पूरी खबर

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  • राष्ट्रीय हिन्दू फ्रंट’ ने विभिन्न संगठनों के साथ मिलकर जनसभा में उठाई मांग।

शारदा रिपोर्टर मेरठ। जनसंख्या नियंत्रण कानून, यूनिफॉर्म सिविल कोड (एनआरसी) लागू करने और वक्फ बोर्ड को पूरी तरह समाप्त करने की मांग को लेकर शुक्रवार को ‘राष्ट्रीय हिन्दू फ्रंट’ जनसंख्या समाधान फाउन्डेशन के सदस्यों ने चौधरी चरण सिंह पार्क जनसभा की। इस दौरान उन्होंने जनसांख्यिकीय असंतुलन के समाधान के लिए प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम कार्यालय पर सौंपा।

बैठक कर रहे कार्यकतार्ओं ने कहा कि अंधाधुंध संतानोत्पत्ति करने की प्रवृत्ति पर जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाकर अंकुश लगाने में एक-एक पल की देरी भारत और भारतीय संस्कृति के लिए पूर्व की भांति ही विघटनकारी साबित हो सकती है। एक वर्ग विशेष द्वारा रणनीति के तहत जान-बूझकर जनसंख्या बढ़ाई जा रही है। जबकि सनातन समाज की युवा पीढ़ी में एक बच्चे तक सीमित रहने की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण देश के अनेक भागों में 8 वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों में जनसंख्या का संतुलन उस वर्ग विशेष के पक्ष में झुकता दिखने लगा है।

कहा कि भारत जनसंख्या में धार्मिक असंतुलन के कारण हुए विघटन के दंश का प्रत्यक्ष भुक्तभोगी है, परन्तु पूर्व की सरकारों की विभाजन के तुरन्त बाद से जारी तुष्टिकरण की नीति के चलते अब फिर से वैसी ही परिस्थितियां निर्मित होती दिखाई दे रही है।

बताया कि विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच जनसंख्या का अनुपात वर्तमान अनुपात के अनुसार बनाए रखने के उद्देश्य से ‘जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग को लेकर ‘राष्ट्रीय हिन्दू फ्रंट’ (जनसंख्या समाधान फाउन्डेशन) द्वारा विगत लगभग 12 वर्षों से अभियान चला रहा है। इस अभियान को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं संगठन के मुख्य संरक्षक डा. इंद्रेश कुमार और केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह सहित 125 सांसदों का समर्थन प्राप्त है।

उन्होंने बताया कि, संगठन ‘जनसंख्या नियंत्रण कानून’, समान नागरिक संहिता, एनआरसी और घुसपैठ नियंत्रण कानून बनाने के साथ-साथ वक्फ बोर्ड को पूरी तरह निरस्त करने की मांग को लेकर लगातार अभियान चला रहा है। इस दौरान संजीव अग्रवाल, सचिन सिरोही, वर्षा कौशिक, कविता सिरोही, सतीश भड़ाना, धर्मेंद्र मलिक, बालकिशन राय, अलंकार नागर, अतुल जैन, अमित प्रजापति, सचिन भड़ाना, ब्रहम सिंह आदि ने विचार रखे।

 

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