– गड्ढों में दबी सड़कें, सीवर के खुले मेनहॉल दे रहें हादसों को दावत
कपिल सोनी,मेरठ। भाजपा इन दिनों प्रदेश सरकार के आठ साल के कार्यकाल का जश्न मना रही है। इन आठ सालों को बेमिसाल बताते हुए लगातार कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। लेकिन इन्हीं कार्यक्रमों में आने-जाने वाले रास्ते भाजपाइयों का मुंह चिढ़ा रहे हैं। शहर की सड़कों की बदहाली को देख हर किसी के मन में यही सवाल उठ रहा है कि जब सड़कें हैं इतनी बदहाल तो कैसे कह रहे आठ साल बेमिसाल?
शहर की टूटी सड़कें, उनमें गहरे गड्ढे और खुले सीवरों के ढक्कन लोगों की जान के दुश्मन बन गए हैं। सड़कों पर गहरे गड्ढों के चलते लोगों का चलना दूभर हो गया है। गढ़ रोड, दिल्ली रोड़, शारदा रोड़, बागपत रोड, शास्त्री नगर, भूमिया का पुल, मेरठ कचहरी, प्रहलाद नगर, वेस्ट एंड रोड कैंट की विभिन्न रोड़ शहर में कोई ऐसा एरिया नहीं है, जहां सड़कों का हाल बदहाल ना हो। ज्यादातर इलाकों में सड़कों के हालात बद से बदतर हो गए हैं। यहां पूरी सड़क पर गड्ढे ही नजर आते हैं। लोगों की मानें तो प्रशासन की उदासीनता और अनदेखी के चलते लोग आए दिन गड्ढों के कारण हादसों का शिकार हो रहे हैं, लेकिन इन समस्याओं का समाधान कब होगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
मेरठ शहर विकास की दौड़ में ऐसा भाग रहा है कि, उसकी सड़कें गड्ढों के कारण कराहने लगी हैं। सड़कों का दर्द गहरे होते गड्ढों के साथ बढ़ता जा रहा है। शहर की मुख्य सड़कों की बात करें तो उनकी हालत बहुत खराब हो चुकी है। गढ़ रोड हो, हापुड़ रोड या फिर दिल्ली रोड, जिधर देखो गड्ढों की भरमार है। जिससे हादसों का बोझ बढ़ रहा है। गढ़ रोड की बात करें, तो यहां काली नदी से लेकर हापुड़ अड्डे तक इतने गहरे गड्ढे हैं, कि आप सही से चल भी नहीं सकते।
यही हालात शहर के बीच बहुत सारी सड़कों के हैं। गड्ढों के साथ ही सड़कों के बीच सीवरों के टूटे ढक्कन भी हादसों को दावत दे रहे हैं। गढ़ रोड पर गड्ढों से जनता त्रस्त हो चुकी है। सुनील कुमार, दुष्यंत तोमर और यतेंद्र कुमार ने बताया कि, गढ़ रोड पर गड्ढों की संख्या इतनी हो गई है, कि गिनने में भी नहीं आते। यह पता नहीं चलता कि सड़क में गड्ढे हैं या फिर गड्ढों में सड़क है। गढ़ रोड पर चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है, जिसके चलते दोनों ओर खुदा पड़ा है। जिसके कारण दिनभर धूल-मिट्टी उड़ती रहती है। पूरी रोड टूटी है। जगह-जगह गड्ढे हो चुके हैं, जिसमें आए दिन लोग गिरकर चोटिल होते रहते हैं। इन सड़कों की ओर संबंधित विभाग को ध्यान देना होगा।
सड़कों पर गड्ढों से खतरे में जान
शिवम, अभिषेक चौधरी और मुकुल पंवार का कहना है कि गढ़ रोड पर मेडिकल कॉलेज के पास गहरे गड्ढे हो चुके हैं। हापुड़ अड्डे की ओर चलते हैं तो हालात और भी बदतर होते चले जाते हैं। तेजगढ़ी चौराहे के आसपास ही सड़क में गहरे गड्ढे देखने को मिल जाएंगे। नई सड़क की तरफ चलेंगे तो यह गड्ढे और भी गहरे होते चले जाते हैं। सड़क कहीं भी ऐसी नहीं है जहां गड्ढे ना हों। हापुड़ अड्डे तक गड्ढे ही गड्ढे दिखते हैं जो लोगों की जान को खतरे में डाल रहे हैं।
यहां भी सड़कों के हाल खराब
अनुज गुर्जर, सिद्धार्थ और विकास का कहना है कि शहर में आबू नाले के किनारे वाली सड़क जो मंगल पांडे नगर से होते हुए गुजर रही है, उस पर लंबे समय से गड्ढे हुए पड़े हैं। मंगल पांडे नगर रोड पर ये गड्ढे और भी गहरे होते जा रहे हैं। जिस पर चलना भी मुश्किल होता है। मंगलपांडे नगर कॉलोनी के लोग भी इन गड्ढों से परेशान हैं। सड़क पर कब और कहां हादसा हो जाए पता नहीं चलता। बरसात के समय में ये गड्ढे और भी खतरनाक हो जाते हैं, जब सड़क पर दिखाई नहीं देते।
नजरें हटीं, समझो दुर्घटना घटी
लोगों का कहना है कि शहर की सड़कों पर चलते हुए सतर्कता बहुत जरूरी है, गहरे गड्ढे, खुली नालियां और टूटी सीवर लाइनों के कारण हादसे आम हो चुके हैं। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह समस्या और भी गंभीर है। बारिश के दिनों में तो हालात और बदतर हो जाते हैं, जब पानी में डूबे ये गड्ढे और खुले सीवर जानलेवा साबित होते हैं। मानों नजरें हटते ही दुर्घटना घटनी तय है। सड़कों के हालात बयां करते गड्ढे और टूटे सीवर ढक्कन मरम्मत की मांग कर रहे हैं।