– शहर में संचालित 123 कोचिंग सेंटर्स में महज 74 का मानचित्र स्वीकृत।
शारदा रिपोर्टर
मेरठ। जब कभी कहीं कोई बड़ा हादसा होता है, तब अफसरों की नींद टूटती है। बीते दिनों नोएडा की बहुमंजिला इमारत में चल रहे हॉस्टल में आग की घटना के बाद माना जा रहा था कि, यहां भी फायर ब्रिगेड व प्राधिकरण के अफसरों की नींद टूटेगी। ऐसे भवन जहां कोचिंग सेंटर और हॉस्टल संचालित किए जा रहे हैं, उनकी सुध लेने की याद अफसरों को आएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद अफसर और विभाग दोनों सोते रहे।
नोएडा की आग की घटना की बात करें तो आग में फंसी छात्राओं ने ऊपर से कूदकर अपनी जान बचायी। यह तो बात हो गई नोएडा के हॉस्टल में आग की घटना की बात। हालांकि इससे पहले गुजरात के एक स्कूल में आग की घटना में कई बच्चों की मौत हो गयी थी। बीते साल जुलाई माह में दिल्ली के एक कोचिंग सेंटर में पानी भर जाने से आईएएस की तैयारी कर रहे तीन युवाओं की दर्दनाक मौत हो गई थी।
गुजरात के कोचिंग, स्कूल में आग की घटना और दिल्ली के कोचिंग सेंटर में पानी भर जाने से तीन युवाओं की मौत की वारदात के बाद मेरठी अफसरों खासतौर से मेरठ विकास प्राधिकरण और फायर ब्रिगेड के अफसरों की नींद टूटी थी। प्राधिकरण ने दो चार दिन जब तक मीडिया की सुर्खियां बनी रहीं, अभियान चलाया, लेकिन जिन पर कार्रवाई की बात की जा रही थी, उन एक्शन लेना ही भूल गए।
बीते दिनों नोएडा में आग की वजह से छात्राओं के बहुमंजिला इमारत से कूदकर अपनी जान बचाने की घटना देश भर के सोशल मीडिया पर छाए रहने के बाद भी मेरठी अफसरों की नींद नहीं टूटी। ऐसा लगता है कि अब उन्हें इस प्रकार के हादसों से कोई सरोकार नहीं रह गया है। शहर की बात करें तो अनुमान है कि, यहां करीब 500 कोचिंग संचालित किए जा रहे हैं। जिनमें से बड़ी संख्या में अवैध रूप से संचालित किए जा रहे हैं।
नियम कायदों की यदि बात करें तो बीते साल जुलाई को बेसमेंट में चल रहे कोचिंग सेंटर में तीन युवाओं की मौत की घटना के मेरठी अफसरों को एकाएक ड्यूटी की याद आ गयी और निकल पड़े शहर के कोचिंग सेंटरों की सुध लेने। प्राधिकरण ने कोचिंग सेंटरों की चेकिंग का अभियान शुरू किया। तब प्राधिकरण प्रशासन ने दावा किया था कि सर्वे में कोचिंग सेंटरों के अलावा 66 बेसमेंट में संचालित व्यावसायिक गतिविधियां अवैध पाई गई हैं। इन बेसमेंट को सील किया जाएगा।
अवैध कांप्लेक्सों के बेसमेंट के भी सर्वे की जानकारी दी गयी थी। साथ ही बताया गया था कि 123 बेसमेंट में महज 74 का मानचित्र स्वीकृत पाया गया। इनमें भी स्वीकृत बेसमेंट में से 34 में अवैध रूप से व्यावसायिक उपयोग पाया गया। 49 ऐसे हैं, जिनका मानचित्र स्वीकृत नहीं है। फिर भी उनमें से 32 में व्यावसायिक उपयोग हो रहा है। इस तरह से कुल मिलाकर 66 बेसमेंट अवैध पाए गए हैं। अवैध बेसमेंट को सील किए जाने का दावा किया गया था, लेकिन हमेशा की तरह ढाक के तीन पात स्थिति रही। जिसके चलते इन अवैध कोचिंग सेंटर्स आराम से काम किया जा रहा हैं। जबकि, जिन्हें काम करना चाहिए वह कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं।