शारदा रिपोर्टर मेरठ। ईरान-इजरायल युद्ध के कारण खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। सऊदी अरब सहित कई देशों में अस्थिरता का माहौल है, जिससे वहां कार्यरत विदेशी कर्मचारियों की नौकरियों पर संकट आ गया है। भारत समेत विभिन्न देशों के हजारों कामगारों को अचानक नौकरी से निकाला जा रहा है। इसी संकट की चपेट में मेरठ के लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र निवासी रिजवान खान और उनके अलीगढ़ निवासी भतीजे अली भी आ गए हैं। दोनों सऊदी अरब के मदीना शहर में टेक्नीशियन के रूप में कार्यरत थे। उन्हें युद्ध के माहौल और आर्थिक दबाव का हवाला देते हुए बिना किसी पूर्व सूचना के नौकरी से हटा दिया गया।

कंपनी ने उनकी बकाया सैलरी का भुगतान भी नहीं किया और सीधे भारत का टिकट कराकर वापस भेज दिया। रविवार को भारत लौटे रिजवान ने बताया कि सऊदी अरब में ईरानी मिसाइल हमलों का जबरदस्त खौफ है। रिजवान के अनुसार, सऊदी सरकार किसी भी कीमत पर युद्ध से बचना चाहती है, क्योंकि पहले भी ईरान द्वारा किए गए हमलों से आर्थिक हालात बिगड़ चुके हैं। मौजूदा तनाव ने कंपनियों पर लागत कम करने का दबाव बढ़ा दिया है, जिसके चलते बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है।
रिजवान की करीब 15 हजार रियाल की सैलरी रोक ली गई है, जिससे उन्हें बड़ा नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि सिर्फ भारतीय ही नहीं, बल्कि अन्य देशों के कई कर्मचारी भी इसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। ईद जैसे महत्वपूर्ण त्योहार से ठीक पहले नौकरी छिन जाने से प्रवासी मजदूरों और उनके परिवारों में चिंता का माहौल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका और गहरा असर पड़ेगा। ऐसे में वहां काम कर रहे लाखों प्रवासी भारतीयों के भविष्य पर भी खतरा मंडराने लगा है।

