– पांच हजार से ज्यादा वाहन हर रोज भर रहे फरार्टा, ट्रैफिक व्यवस्था भी चौपट।
शारदा रिपोर्टर मेरठ। रेलवे रोड को बागपत रोड से जोड़ने वाले लिंक रोड पर वाहनों का दबाव जाम की वजह बनने लगा है। आधिकारिक तौर पर अभी इसे नहीं खोला गया है लेकिन हर रोज यहां वाहनों की संख्या बढ़ रही है। इसकी मुख्य वजह ट्रैफिक प्लानिंग है, जिसकी ओर ना तो मेडा ने ध्यान दिया और ना ही ट्रैफिक डिपार्टमेंट ने।

लिंक रोड की सालों से मांग की जा रही थी। दरअसल, बागपत रोड से रेलवे रोड पर आने-जाने के लिए या तो नेशनल हाईवे 58 का रुख करना होता था। नहीं तो शहर के भीतर फुटबॉल तिराहे से रेलवे रोड चौराहा होकर रेलवे रोड आना-जाना होता था। लिंक रोड से महज चंद सेकेंड में यह रास्ता तय होगा।
इस रोड के लिए मेडा ने दो प्रोपर्टी खरीदी हैं। एक प्रोपर्टी यहां बना मकान था और दूसरी हॉस्पिटल का एक हिस्सा। अक्टूबर में दोनों प्रोपर्टी खरीद ली गई लेकिन उसके बाद पहले सैन्य क्षेत्र से जुड़ी दीवार निर्माण और हॉस्पिटल वाली जगह पर सड़क निर्माण के नाम पर लिंक रोड का काम अटका रहा।
लिंक रोड को खोलने से पहले ट्रैफिक प्लान सबसे जरूरी है। बिना प्लानिंग यहां तमाम समस्याएं खड़ी होंगी। जैसे वर्तमान में जाम मुसीबत बनने लगा है। यहां लिंक रोड के बागपत रोड वाले हिस्से पर प्रवेश व निकासी गेट के ठीक सामने डिवाइडर है, जिस कारण वाहन कहीं से भी प्रवेश कर जाते हैं। कई बार हादसे भी हो चुके हैं। झगड़े तक की नौबत आ चुकी है। कहने को यहां एक ट्रैफिक होमगार्ड की ड्यूटी है लेकिन वह काफी नहीं है। अभी तक इस रूट पर प्रकाश व्यवस्था भी नहीं है। यहां टएऊअ को प्रकाश व्यवस्था तैयार करनी है लेकिन अभी तक कोई प्लान सामने नहीं आया है। सबसे बड़ी बात यह है कि अफसर इस मुद्दे पर अभी कुछ बताने की स्थिति में नहीं हैं। जबकि यह पूरा प्रोजेक्ट राज्यसभा सांसद डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी की निगरानी में शुरू हुआ था।
दीवार पर लिखी जानी है क्रांति गाथा
इस पूरे रूट को क्रांति पथ का नाम दिया गया है। इसकी एक तरफ सैन्य दीवार है, जिस पर क्रांतिगाथा लिखी जाएगी। यहां पेटिंग होगी जिसके जरिए आजादी में मेरठ की भूमिका, यहां के स्वतंत्रता सेनानी, देश के स्वतंत्रता सेनानी व उनका संघर्ष दशार्या जाएगा। अभी तक इस मामले में भी कोई अपडेट विभाग के पास नहीं है।

