HomeEducation Newsविश्व में भारतीय पत्रकारिता ही सबसे विविधतापूर्ण है

विश्व में भारतीय पत्रकारिता ही सबसे विविधतापूर्ण है

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  • व्यंगात्मक पत्रकारिता को समझने की जरूरत है-डॉ. अनूप


शारदा रिपोर्टर मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय मेरठ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में समाज पर मीडिया का प्रभाव: विरासत मीडिया और नया मीडिया पर अंतर्राष्ट्रीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस व्याख्यान में क्लीवलेंड स्टेट यूनिवर्सिटी, ओहीयो, संयुक्त राज्य अमेरिका के मास कम्यूनिकेशन विभाग के प्रोफेसर डॉ. अनूप कुमार ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखे।

अपने संबोधन में डॉ. अनूप कुमार ने विश्व सत्र पर पत्रकारिता एवं जनसंचार के प्रभाव को इंगित करते हुए कहा कि मीडिया का समाज पर बहुत व्यापक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि प्रथम विश्वयुद्ध के समय अमेरिकी समाजशास्त्रीयों ने इस बात को सर्वप्रथम रेखांकित किया था। उन्होंने अपनी शोधों में यह पाया कि किसी भी प्रोपेगेंडा को बड़े पैमाने पर प्रसारित करने के लिए मीडिया बहुत उपयोगी है। डॉ. कुमार ने कहा कि मीडिया ना केवल समाज को प्रभावित करता है वरन यह समाज के साथ-साथ प्रत्येक मनुष्य को व्यक्तिगत रूप से भी प्रभावित करता है।

विद्यार्थियों के प्रश्नों का जवाब देते हुए प्रोफेसर अनूप कुमार ने कहा कि भारतीय पत्रकारिता विश्व में सर्वाधिक विविधतापूर्ण पत्रकारिता है क्योंकि यहां की सामाजिक संरचना विविधताओं से भरी हुई है। उन्होंने कहा कि समाचार के नकारात्मक प्रभाव को दूर करने की जरूरत है और पत्रकारों को आज के आधुनिक दौर में न्यू मीडिया को भलीभांति समझना होगा।

इस अवसर पर अतिथि का परिचय देते हुए पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डाक्टर सुभाष चंद्र थलेडी ने कहा कि आज के समय में लोग पत्रकारिता को बहुत ही सरल मानते हैं जबकि वास्तविकता में यह बहुत ही चुनौतीपूर्ण कार्य है क्योंकि इसमें विभिन्न पहलुओं का बहुत ही सावधानीपूर्वक अध्ययन करते हुए उसको अपनी रिपोर्टों में सम्मिलित करना होता है। इस कार्यक्रम का संचालन पत्रकारिता विभाग की छात्रा गरिमा पांडेय ने किया। संयोजन व धन्यवाद ज्ञापन विभाग की सहायक आचार्या डॉ. प्रीति सिंह ने किया।

 

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