- कासिम पुजारी बनकर रहता था, हिंदू संगठन के नेता ने उठाई एटीएस से जांच कराने की मांग।
शारदा रिपोर्टर मेरठ। शिव मंदिर में पुजारी बनकर रहने वाले कासिम के पकड़े जाने के बाद हिंदू संगठन के कार्यकतार्ओं ने शुक्रवार सुबह मंदिर का शुद्धिकरण किया। कार्यकर्ता हरिद्वार से लाया गया गंगाजल लेकर मंदिर में पहुंचे। उन्होंने पूरे मंदिर का गंगाजल और मंत्रोच्चार से शुद्धिकरण किया। फिर पुजारियों और ग्रामीणों ने मिलकर हनुमान चालीसा का पाठ किया।
इस पर हिंदू रक्षा संगठन दल के कार्यकतार्ओं ने कहा कि आस्था-विश्वास से खिलवाड़ करने वाले पर रासुका लगनी चाहिए। उसे कठोर सजा दी जानी चाहिए। एटीएस को इस मामले की जांच करनी चाहिए। देशभर के सभी मंदिरों में पुजारियों का वैरिफिकेशन किया जाना चाहिए।
सरधना थाना क्षेत्र के दादरी गांव में प्राचीन शिवमंदिर है। जहां बुधवार को कार्यकतार्ओं ने मुस्लिम युवक कासिम को पकड़ा था। कासिम इस मंदिर में पिछले एक साल से कृष्णा बनकर रह रहा था। उसने ग्रामीणों को बताया कि वो एक पुजारी है। अपना नाम उसने कृष्णा पुत्र संतरपाल बताकर मंदिर में स्थान बनाया था।
ग्रामीणों ने बताया कि वो भविष्य भी बताता था और झाड़-फूंक से इलाज भी करता था। मंदिर की साफ-सफाई और भगवान की सेवा करते-करते उसने हम लोगों का भरोसा जीता था। इसके बाद मंदिर में पुजारी बनकर रहने लगा था। पिछले दिनों जब कावड़ यात्रा शुरू होने वाली थी, तो वह अपने घर से आधार कार्ड लाने की बात कह कर 15 दिन के लिए लापता हो गया था। फिर जैसे ही कावड़ यात्रा शिवरात्रि के दिन समाप्त हुई, वो फिर दोबारा मंदिर में आकर रहने लगा।
ग्रामीणों ने बताया कि कासिम का चाल-चलन डेढ़ महीने पहले से ठीक नहीं लग रहा था। इसलिए उसे मंदिर से हटा दिया था। तो वो कहीं चल गया था। बाद में फिर आकर रहने लगा था। मंदिर से साधु के चले जाने के बाद दान पात्र से चोरी भी होने लगी थी।
जिसकी वजह से लोगों को शक भी हुआ था। लेकिन बुधवार को मंदिर में भंडारा चल रहा था। तभी कुछ लोगों ने कासिम को दानपात्र से दक्षिणा चोरी करते हुए पकड़ा था। इसके बाद जब उससे पूछताछ की। उसके आधार कार्ड की जांच की गई, तो वो कासिम निकला। जो बिहार के सीतामढ़ी जिले का रहने वाला था। वहीं पता चला कि कासिम के अब्बू जिसका नाम अब्बास है वो बिहार में एक मस्जिद में मौलवी है।
मुजफ्फरनगर में भी मंदिर में रहा: पूछताछ में ये भी पता चला है कि कासिम इससे पहले दिल्ली फिर मेरठ और उसके बाद मुजफ्फरनगर के खतौली के मंदिर में रह चुका है। दादरी गांव के शिव मंदिर में पंडित के रूप में सेवा कर रहा था। कासिम ने मंदिर में रहने के लिए कहीं से पूरी ट्रेनिंग भी ली थी। कासिम को कृष्ण बन कर रहने के लिए मंत्र के साथ हाथ की रेखा भी पढ़नी आती थी। वो जरुरत पड़ने पर अपने ठिकाने भी बदलता था।
इंटेलिजेंस कर रही पूछताछ
पकड़े गए कासिम से पुलिस और एलआईयू की टीमें कई बिंदुओं पर पूछताछ कर रही हैं कि कहीं कासिम धर्मांतरण के रैकेट से तो जुड़ा नहीं है? उसका कनेक्शन छांगुर बाबा से तो नहीं है? आतंकी गतिविधियों से कनेक्शन तो नहीं है? किसी बड़ी देश विरोधी साजिश में तो शामिल नहीं है? ऐसे में उत्तर प्रदेश पुलिस अब बिहार पुलिस से भी इस मामले में मदद ले रही है। सभी पहलूओं को देखते हुए पूरी जानकारी जुटाई जा रही है।
बिहार के कासिम पर लगे रासुका
हिंदू रक्षा संगठन दल के कार्यकर्ता सचिन सिरोही अपनी टीम के साथ मंदिर में मौके पर पहुंचे। सचिन सिरोही ने कहा कि आज हमने गांव के ही पुजारी जी से पूरे मंदिर का गंगाजल से शुद्धिकरण कराया है। क्योंकि कासिम ने हमारे मंदिर को अशुद्ध कर दिया था। यहां मंदिर में कावंड़ियों के लिए भोजन बना है। ये मुस्लिम उनके भोजन में जहर भी मिला सकता था। मंदिर में आने वाली बहन-बेटियों का हाथ देखता था। उनके साथ कुछ गलत भी कर सकता था। गांव वालों को भी नुकसान पहुंचा सकता था। मंदिर को इसने अशुद्ध किया है। यहां आने के बाद उससे बड़ी-बड़ी गाड़ियों में लोग मिलने आते थे। उन संदिग्ध लोगों को हमारे गांव में कोई नहीं जानता है। धर्म का मजाक बनाने और लोगों की आस्था-विश्वास से खिलवाड़ करने वाले पर रासुका लगनी चाहिए। उसे कठोर सजा दी जानी चाहिए।


