Homeउत्तर प्रदेशMeerutमेरठ: नारकोटिक्स के नाम पर बर्दाश्त नहीं होगा उत्पीड़न

मेरठ: नारकोटिक्स के नाम पर बर्दाश्त नहीं होगा उत्पीड़न

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– होलसेलर एंड रिटेलर कैमिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन।

शारदा रिपोर्टर मेरठ। हम नशे का कारोबार नहीं करते हैं। हम दवाई बेचते हैं, जिससे लोगों की जिन्दगी बचती है। यह कहना था होलसेलर एंड रिटेलर कैमिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों का। सोमवार को होलसेलर एंड रिटेलर कैमिस्ट एसोसिएशन के दर्जनों पदाधिकारियों ने कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन डीएम कार्यालय में सौंपा।

 

 

ज्ञापन के माध्यम से बताया कि, उत्तर प्रदेश में करीब 2.5 लाख लाईसेंसधारी दवा विक्रेता है और प्रत्येक दवा की दुकान से करीब पांच परिवार जुड़े है, जिससे उनका घर चलता है। उन्होंने बताया कि, अभी एफडीए विभाग की प्रमुख सचिव रोशन जैकब ने लाईसेंस की जांच का आदेश पूरे उत्तर प्रदेश में दिया है, जिससे ड्रग विभाग के अधिकारियों के साथ नारकोटिक्स विभाग के अधिकारी भी बाजारों में आ रहे हैं और सत्यापन के नाम पर जमकर उत्पीड़न हो रहा है।

जबकि, प्रत्येक पांच वर्ष में ड्रग लाईसेंस का सत्यापन होता है तथा विभाग के द्वारा व्यापारी से दुकान से सम्बन्धित सभी दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड करवाये जाते हैं, फिर जांच करके लाईसेंस का नवीनीकरण होता है। लेकिन, सत्यापन के नाम पर भष्ट्राचार व उत्पीड़न हो रहा है, जो किसी भी सूरत में नहीं होना चाहिए। क्योंकि, शेड्यूल एच के अन्तर्गत आने वाली दवाई कम्पनी बनाती है। यह दवाईयां दवा विक्रेता के पास बिल से आती है और बिल से बिकती है। फिर भी दवा विक्रेता के साथ अपराधी जैसा व्यवहार क्यों हो रहा है।

जांच के नाम पर नारकोटिक्स विभाग, पुलिस विभाग का दवा विक्रेता के यहां दखल नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा कि, नारकोटिक्स के अन्तर्गत आने वाली दवाई सरकारी नियन्त्रण में बिकनी चाहिए तथा इन दवाई को बेचने वाला व्यक्ति भी सरकारी होना चाहिए। जिससे इनके दुरुपयोग की संभावना शून्य हो जायेगी। जबकि, ड्रग विभाग एक बहुत बड़ा विभाग है और दवा व्यापारियों की लगातार जांच करता है। फिर अन्य विभागों की जरूरत क्यों है।

इसलिए ड्रग विभाग की समीक्षा की बहुत अधिक आवश्यकता है और ड्रग विभाग के पास सीयूजी नम्बर भी नहीं है। इसलिए विभाग के अधिकारियों के पास सरकारी नंबर का होना जरूरी है। रिहायशी इलाकों में लाईसेंस, विभाग द्वारा ही प्रदान किये गये थे। उनके निरस्त होने से लाखों लोग बेरोजगार हो जायेंगे।

रजिस्टर्ड रेट एग्रीमेंट एक जटिलता का विषय है। कई दुकान मालिक ऐसे हैं जो रजिस्टर्ड किरायानामा कराना नहीं चाहते हैं और कुछ दुकानदारों का किरायानामा 30-40 साल पुराना है। ऐसा नियम लागू करने से हजारों दुकाने बंद हो जायेंगी।

इसलिए हम सभी यह मांग करते हैं कि, अगर व्यापारी का व्यापार ही बंद हो जायेगा तो वह कहा जायेगा और उसका सरकार से भी मोह भंग हो जायेगा, इसलिए सत्यापन तथा नारकोटिक्स के नाम पर दमनकारी उत्पीड़न बंद होना चाहिए।

प्रदर्शन करने वालों में इन्द्रपाल सिंह, घनश्याम मित्तल, राजेश अग्रवाल, अरूण त्यागी, विकास मित्तल, गगन गुप्ता, प्रवीण दुआ, लोकेश ठाकुर और समस्त कार्यकारिणी सदस्य मौजूद रहे।

 

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