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Thursday, January 15, 2026
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Homeउत्तर प्रदेशMeerutमुख्यमंत्री चयन पर भाजपा में बढ़ सकती है रार

मुख्यमंत्री चयन पर भाजपा में बढ़ सकती है रार

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– वसुंधरा और शिवराज को अनदेखा करना पड़ सकता है भारी
– भाजपा के ही बड़े नेता इन दोनों के जुड़े हैं साथ
– लोकसभा चुनाव 2024 पर पड़ सकता है इस नई राजनीति का असर


अनुज मित्तल ( समाचार संपादक)

मेरठ। भाजपा राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में पूर्ण बहुमत पा चुकी है। लेकिन तीन दिन बीतने के बाद भी इन तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री के नाम तय नहीं कर पा रही है। इसके पीछे भाजपा के अंदर ही चल रही छिपी हुई राजनीति और  रार को माना जा रहा है। क्योंकि मोदी और शाह का एक भी कदम लोकसभा चुनाव में उनके खिलाफ जा सकता है।

 

भाजपा में सबकुछ अनुशासित और ठीक चल रहा है, ऐसा नहीं है। कहीं न कहीं लंबे समय से पार्टी के भीतर असंतोष पनप रहा है। इसके पीछे अमित शाह की लॉबी का हावी होना और वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा माना जा रहा है।

 

भाजपा की अंदरूनी राजनीति में चर्चा है कि केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी के साथ ही भाजपा संगठन के वर्तमान और पूर्व पदाधिकारी एक खेमे में है, जबकि अमित शाह दूसरे खेमे को लीड कर रहे हैं। अमित शाह का बढ़ता दखल और प्रधानमंत्री मोदी का उन पर भरोसा पार्टी के कुछ नेताओं को हजम नहीं हो रहा है।

चर्चा है कि काफी दिनों से राजनाथ सिंह और नितिन गड़करी के साथ वसुंधरा राजे सिंधिया, शिवराज सिंह चौहान आदि नेताओं की करीबी बढ़ती जा रही है। ऐसे में यह गुट भविष्य में नितिन गड़करी को प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तावित करना चाहता है। शायद यही कारण है कि अमित शाह गुट राजस्थान में मजबूत वसुंधरा और मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान को किनारे लगाने की कोशिश में लगे हैं।

 

ऐसे में साफ है कि यदि इन दोनों नेताओं को दरकिनार किया गया तो भाजपा के भीतर जो असंतोष अभी भीतर ही भीतर चल रहा है, वह बाहर भी आ सकता है। जिसका सीधे-सीधे असर लोकसभा चुनाव 2024 पर पड़ेगा।

 

काफी दिनों से चल रहा है प्रयास

वसुंधरा राजे सिंधिया और शिवराज सिंह चौहान को किनारे लगाने का प्रयास काफी दिनों से चल रहा है। मुख्यमंत्री का नाम प्रस्तावित किए बगैर इन राज्यों में चुनाव कराने के पीछे सिर्फ गुटबाजी से दूर रहकर जीत हासिल करना ही पार्टी नेतृत्व का लक्ष्य नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक गुट की सीधे-सीधे मंशा थी कि इन दोनों को किनारे कर चुनाव लड़ा जाए और बहुमत पाने के बाद दोनों को आसानी से किनारे कर दिया जाए।

 

वसुंधरा के पक्ष में 60 विधायक

राजस्थान में भाजपा ने 115 सीटें जीती हैं। सरकार बनाने के लिए यहां 101 सीट की जरूरत थी। ऐसे में भाजपा स्पष्ट बहुमत लेकर आयी है। नवनिर्वाचित 115 विधायकों में से 60 विधायक खुलकर वसुंधरा राजे सिंधिया के साथ हैं। जिन्होंने बुधवार को उनके मुलाकात भी की। इसी को देखते हुए बृहस्पतिवार को वसुंधरा राजे दिल्ली पहुंच रही हैं।

 

संघ परिवार रख रहा है पूरे मामले पर नजर

सूत्रों की मानें तो संघ परिवार इस भीतर ही भीतर चल रही चल रही राजनीति से अनजान नहीं है। वह पूरे मामले पर नजर रखे हुए है। यदि जरूरत पड़ी तो संघ का सीधा हस्तक्षेप मध्यप्रदेश और राजस्थान में देखने को मिलेगा। क्योंकि संघ परिवार कभी नहीं चाहेगा, यह रार खुलकर बाहर आए और इसका असर लोकसभा चुनाव पर पड़े।

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