– गंगा तट पर प्लेज लगाने के लिए डाल रहे गंदे कूड़े का खाद, जलीय जीवों की जान को भी खतरा।
शारदा रिपोर्टर हस्तिनापुर। सरकार गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए विभिन्न अभियान चला रही है, वहीं मुर्गे की बीट का उपयोग करके गंगा को प्रदूषित किया जा रहा है। ज्यादा मुनाफा लेने के चक्कर में घड़ियाल डॉल्फिन परियोजनाओं को भी खतरे में डाला जा रहा है। यही कारण है कि आज यही पवित्र नदी लगातार बढ़ते प्रदूषण की मार झेल रही है। धार्मिक आस्था के नाम पर गंगा में प्लेज (अस्थायी/स्थायी संरचनाएं) भी नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित कर रहे हैं, जिससे प्रदूषण और अधिक गंभीर होता जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार गंगा में गिरने वाला औद्योगिक कचरा, सीवर का पानी और ठोस अपशिष्ट नदी के जल की गुणवत्ता को लगातार खराब कर रहा है। कई शहरों में आज भी बिना शोधन के नालों का पानी सीधे गंगा में छोड़ा जा रहा है। इससे जल में घुलित आॅक्सीजन की मात्रा कम हो रही है, जो मछलियों और अन्य जलीय जीवों के लिए जानलेवा साबित हो रही है।
गंगा में पाए जाने वाले डॉल्फिन, कछुए, मछलियां और अन्य सूक्ष्म जलीय जीव प्रदूषण के कारण तेजी से विलुप्त हो रहे हैं। वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार भारी धातुओं और रासायनिक तत्वों की मौजूदगी से इन जीवों की प्रजनन क्षमता प्रभावित हो रही है। कई क्षेत्रों में मछलियों के मरने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं, जो नदी के स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।



