– सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों ने कार्रवाई के विरोध में सोशल मीडिया पर शेयर किए बैनर।
शारदा रिपोर्टर मेरठ। सेंट्रल मार्केट में 44 संपत्तियों पर सीलिंग और सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी भूखंडों में कमर्शल गतिविधियों को बंद करने के आदेश के बाद जहां व्यापारियों में कार्रवाई से दहशत है तो वहीं जनप्रतिनिधियों के खिलाफ रोष भी दिखाई दे रहा है।

सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों द्वारा बनाए गए कुछ सोशल मीडिया ग्रुप में भाजपा के ऊर्जा राज्यमंत्री डॉ सोमेंद्र तोमर, सांसद अरुण गोविल और महापौर हरिकांत अहलूवालिया के फोटो के साथ लापता लिखे हुए पोस्टर भी वायरल हो रहे हैं। इस पोस्टर को व्यापारी खूब शेयर कर रहे हैं ,इसके साथ-साथ सोशल मीडिया ग्रुप पर कुछ व्यापारी इनके साथ कमेंट भी कर रहे हैं।
सोशल मीडिया ग्रुप पर व्यापारियों ने यह पोस्ट शेयर करते हुए लिखा है कि इस प्रकार के बैनर पूरे शहर में लगने चाहिए, ताकि सभी को यह पता चल सके की जब हजारों लोगों के रोजगार बंद हो रहे थे और उनकी आजीविका पर संकट था उसे समय वह जनप्रतिनिधि जिन्हें उन्होंने अपने लिए चुना था वह गायब थे।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुदीप जैन ने इस पर प्रकरण पर कहा कि व्यापारियों द्वारा वोट के अधिकार से ऐसे जनप्रतिनिधि चुने गए थे जिनसे उन्हें यह उम्मीद थी कि वह उनकी बात को सदन में उठाएंगे और उनके सुख-दुख में शामिल होंगे। लेकिन जब व्यापारियों पर इतनी बड़ी मुसीबत आई है उसे समय जब वह उनके बीच नहीं पहुंच रहे हैं तो व्यापारी इससे नाराज है और इसीलिए उन्होंने इस प्रकार के पोस्टर लगाए हैं।
कोई नेता नहीं चाहता उसकी वोट खत्म हो: सेंट्रल मार्केट प्रकरण में सक्रिय रहे किसान मजदूर संगठन के महानगर अध्यक्ष विजय राघव ने कहा कि प्रकरण हमारे भी संज्ञान में है लेकिन कोई भी जनप्रतिनिधि या नेता यह नहीं चाहता कि मेरी वोट खराब हो या मैं कुछ ऐसा करूं जिससे लोग मेरे से नाराजगी रखें। लेकिन यह मामला कहीं न कहीं सुप्रीम कोर्ट का है और सभी इसकी अवहेलना से बचना चाहते हैं इसलिए शायद भाजपा के नेता इससे दूरी बनाए हुए हैं।
व्यापारियों में है नाराजगी: सेंट्रल मार्केट में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इतनी बड़ी कार्रवाई होने के बाद भाजपा के जनप्रतिनिधियों का उनके बीच न पहुंचना और सांसद ,महापौर शहर में भाजपा के होने के बावजूद केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार होने के बाद व्यापारियों में नाराजगी है। व्यापारियों को यही लगता है कि यदि सरकार चाहती तो उनके प्रतिष्ठान आज स्थिति में नहीं पहुंचते।

