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क्या मेरठ शहर में हैट्रिक लगा पाएंगे सपा विधायक रफीक अंसारी, मुस्लिम वोट बंटा तो किसे होगा फायदा

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मेरठ शहर सीट पर सियासी बदले समीकरण, एआइएमआइएम और आजाद समाज पार्टी के मैदान में उतरने से बढ़ी सरगर्मी


मेरठ। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मेरठ शहर सट पर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। सवाल यह है कि क्या समाजवादी पार्टी के विधायक रफीक अंसारी लगातार तीसरी बार जीतकर हैट्रिक लगा पाएंगे। इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की निर्णायक भूमिका रही है और इसी को लेकर नए समीकरण बन रहे है।मेरठ शहर विधानसभा सीट अनारक्षित है और यह मेरठ लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार इस सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 3 लाख 12 हजार है। 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां कुल 2 लाख 1 हजार 638 वोट पड़े थे और मतदान प्रतिशत 64.55 रहा था।

मेरठ शहर में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 1 लाख 10 हजार से अधिक बताई जाती है। इसके अलावा वैश्य, पंजाबी, ब्राह्मण और एससी वोट भी निर्णायक हैं। इसी जातीय समीकरण पर सभी दलों की नजर है। आपको बता दें कि, रफीक अंसारी ने 2017 में भाजपा के दिग्गज नेता लक्ष्मीकांत वाजपेयी को 28 हजार 769 वोटों से हराया था। तब उन्हें 1 लाख 3 हजार 217 वोट मिले थे। इसके बाद 2022 में उन्होंने फिर भाजपा के कमल दत्त शर्मा को 26 हजार 65 वोटों के बड़े अंतर से हराया। उन्हें 1 लाख 6 हजार 395 वोट मिले थे, जबकि भाजपा को 80 हजार 330 वोट मिले। सपा के लिए यह सीट 2017 से मजबूत गढ़ बनी हुई है। रफीक अंसारी शहर के इकलौते विपक्षी विधायक हैं, बाकी अन्य सीटों पर भाजपा का कब्जा रहा। लेकिन 2022 में भाजपा को और तीन सीटों का नुक़सान हुआ है। दरअसल, उनकी पकड़ मुस्लिम बहुल इलाकों के साथ-साथ व्यापारी वर्ग में भी मानी जाती है। लेकिन इस बार चुनौती बड़ी है। एआईएमआईएम और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने मुस्लिम प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर ली है। 2022 में एआईएमआईएम के इमरान अहमद को 3 हजार 38 वोट और आजाद समाज पार्टी के अली शेर को 132 वोट मिले थे। भले ही आंकड़ा छोटा हो, लेकिन कांटे की लड़ाई में यह वोट निर्णायक हो सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि, अगर मुस्लिम वोट तीन जगह बंटता है तो इसका सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है। भाजपा यहां हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण और मुस्लिम वोटों के बिखराव की रणनीति पर काम कर रही है। वहीं सपा का तर्क है कि मुस्लिम मतदाता भाजपा को हराने के लिए एकजुट होकर सपा के साथ ही जाएगा। हालांकि, फिलहाल रफीक अंसारी का दावा है कि विकास और भाईचारे के नाम पर जनता तीसरी बार भी उन्हें चुनेगी। जबकि भाजपा इस बार सीट वापस छीनने के लिए नया चेहरा और नई रणनीति पर मंथन कर रही है।

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