HomeEducation Newsअन्तर्महाविद्यालय संस्कृतवादविवाद प्रतियोगिता में गरजे विद्यार्थी

अन्तर्महाविद्यालय संस्कृतवादविवाद प्रतियोगिता में गरजे विद्यार्थी

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शारदा न्यूज़, मेरठ। आज चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में आयोजित व्याससमारोह के दूसरे दिन अन्तर्महाविद्यालयवादविवाद प्रतियोगिता, शोधसंगोष्ठी, कथा तथा संस्कृत कविसमवाय का आयोजन किया गया।

अन्तर्महाविद्यालयवादविवाद प्रतियोगिता का विषय था- प्रारब्ध का भोग अवश्य ही भोगना पड़ता है चाहे वह शुभ हो अथवा अशुभ। उद्योग भी तो सदा उसी दैव के अधीन ही रहता है वह जैसा चाहे वैसा करता है – श्रीमद्देवीभागवतपुराण। संस्कृत विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर, रघुनाथ गर्ल्स पी. जी. कॉलेज मेरठ, महामना मालवीय महाविद्यालय खेकड़ा, आदि से आये अनेक छात्र-छात्राओ ने पक्ष-विपक्ष में अपने विचार प्रस्तुत किये।

पक्ष में प्राची, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर मेरठ, दिव्या, रघुनात गर्ल्स पी. जी. कॉलेज मेरठ, मीनाक्षी, महामना मालवीय महाविद्यालय खेकड़ा ने दैव (भाग्य) के महत्त्व को बताया तथा अनेक उदाहरणों के द्वारा विपक्ष का खण्डन किया। किसी ने कर्म के प्रकार नित्य, नैमित्तिक, प्रायश्चित का उल्लेख किया तो किसी ने त्रिविध कर्म प्रारब्ध, क्रियमाण एवं संचित कर्म का विपक्ष में – अंकित, स्वीटी तथा सन्नी राणा आदि छात्रों ने उद्यम (कर्म) का महत्त्व अनेक प्राचीन व नवीन उदाहरणों के द्वारा अपने मतों को प्रतिपादित किया व अपने मतों को पुष्ट किया। तत्पश्चात सत्र में कृष्ण कथा का प्रस्तुतीकरण किया जिसमें कृष्ण की अनेक लीलायों का वर्णन किया गया। कथा में वर्णित कृष्ण की महिमा ने सभी संस्कृतनुरागियों व अतिथियों को मन्त्रमुग्ध कर दिया।

द्वितीय सत्र की शोध संगोष्ठी में सर्वप्रथम व्यास सम्मेलन के प्रणेता महामहोपाध्याय प्रो. सुधाकराचार्य त्रिपाठी ने “श्रीमद् देवी भागवत पुराणे अम्बुवाची” विषय पर शोध सत्र प्रस्तुत किया। अंबुवाची शब्द का प्रयोग देवी भागवत पुराण में किया गया है जो असम की देवी कामाख्या से संबंधित है और जहां आज भी श्रीमद् देवी भागवत पुराण को विशेष महत्व दिया जाता है। श्रीमती पारुल ने त्रिशिरासो विविध रूपाणी विषय पर एक शोध पत्र प्रस्तुत किया जिसमें इंद्र द्वारा मारे जाने पर त्रिशिरासो मुनि के सिर से निकले हजारों जीवों के विभिन्न व्यक्तित्वों का वर्णन किया गया है। इसी सत्र में देवी स्तुति कथा का आयोजन किया गया जिसमें बताया गया कि देवी की स्तुति से ब्रह्मा, विष्णु और महेश को भी दुष्टों का नाश करने की शक्ति प्राप्त होती है। देवी की पार्वती रुद्राणी, वैष्णवी और सरस्वती हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो स्वाई ने अपने वक्तव्य में वाद विवाद प्रतियोगिता तथा कथा की प्रशंसा की। उन्होंने व्यास समारोह के कार्यक्रम के प्रतियोगिता के विषय को समीचीन कहा। उन्होंने बताया इस जगत में पुनः पुनः अपने कर्म के कारण आता है। कर्मफल सम्पादन का अधिकारी नहीं, कर्म सम्पादन का अधिकारी बाधा के बिना कर्म नहीं होता । कार्यक्रम के मुख्यातिथि कान्दु चरण पण्डा ने सभी विद्यार्थियों को शुभकानाएं दी। निर्णायक के रूप में डॉ सपना, डॉ छाया रानी, डॉ सत्यपाल शर्मा ने निर्णायक मण्डल को सुशोभित किया। प्रथम सत्र में सुमित तथा द्वितीय सत्र में साक्षी ने संचालन किया। समयपालक के रूप में तुषार गोयल रहे।

विसमवाय में प्रसिद्ध काव्यकरा डॉ वागीश दिनकर, डॉ अंजु रतूड़ी, डॉ सन्तोष कुमारी, डॉ चंद्रशेखर मिश्र तथा विद्यार्थियों ने सभी श्रुति गणों का मन तृप्त कर दिया। डॉ सन्तोष कुमारी ने आगामी कार्यक्रम के विषय में वीथी द्वारा बताया। प्रो. पूनम लखन पाल, डॉ. चन्द्रशेखर मिश्रा, डॉ. भवानी रामचन्द्रन, डॉ. राजबी रेन्द्र कुमार, डॉ. ओमपाल सिंह, डॉ. विजय बहादुर, साहिल तारिका आदि मौजूद रहे।अन्तर्महाविद्यालयवादविवाद प्रतियोगिता निर्णय

प्रथम अंकित, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर, मेरठ द्वितीय- दिव्या, रघुनाथ गर्ल्स पी जी कॉलेज, मेरठ,तृतीय – प्राची, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर, मेरठ रहे।

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