रूबी समेत परिवार को समझौते के दबाव की आशंका, दावा-एक बार हो चुका प्रयास
शारदा रिपोर्टर मेरठ। कपसाड़ कांड में अदालत में सुनवाई शुरू होने से पहले पीड़ित परिवार को एक बार फिर अपनी सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। 23 अक्टूबर से मुकदमे का ट्रायल शुरू होने की तैयारी के बीच परिवार को आशंका है कि आरोपी पक्ष के लोग गवाहों पर दबाव बनाने या उन्हें परेशान करने की कोशिश कर सकते हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि इससे पहले भी तीसरे पक्ष के जरिए समझौते का दबाव बनाने की कोशिश की गई थी। सोमवार को इस मामले में वादी पक्ष एसएसपी से मुलाकात कर सकता है।
कपसाड़ कांड में सुनीता जाटव की हत्या और उनकी बेटी रूबी के अपहरण के मामले में गांव के ही पारस सोम पर आरोप हैं। रूबी इस मुकदमे की मुख्य गवाह है। उसके अलावा उसका भाई नरसी कुमार, पिता सतेंद्र कुमार और वारदात के समय रूबी व उसकी मां के साथ मौजूद रहीं दो किशोरी भी महत्वपूर्ण गवाह हैं। सुनवाई के दौरान इन गवाहों के बयान मामले की दिशा तय करने में अहम हो सकते हैं।
परिवार को सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि अदालत में गवाही देने के लिए पहुंचने के दौरान गवाहों पर किसी तरह का दबाव न बनाया जाए। पीड़ित पक्ष चाहता है कि गवाह बिना किसी भय के अपने बयान दर्ज करा सकें और मुकदमे की सुनवाई निष्पक्ष माहौल में हो। ऐसे में गवाहों की सुरक्षा और परिवार की शिकायतों पर पुलिस-प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।
वारदात की मुख्य गवाह है रूबी
इस मामले में रूबी की गवाही को अहम माना जा रहा है, क्योंकि वह वारदात के समय मौके पर मौजूद थी। अभियोजन पक्ष के लिए उसका बयान घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण हो सकता है। नरसी कुमार की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे के मुताबिक 8 जनवरी 2026 को खेत पर रूबी का अपहरण करने का आरोप लगाया गया था। विरोध करने पर उसकी मां सुनीता जाटव पर धारदार हथियार से हमला किया गया। उपचार के दौरान सुनीता की मौत हो गई थी।
समझौते के कथित दबाव से बढ़ी चिंता
पीड़ित परिवार का कहना है कि मुकदमे की सुनवाई शुरू होने के साथ ही उनकी चिंता बढ़ गई है। परिवार को आशंका है कि आरोपी पक्ष से जुड़े लोग किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से समझौते का दबाव बना सकते हैं। भाई नरसी का आरोप है कि पहले भी इस तरह की कोशिशें हो चुकी हैं। अब गवाही की प्रक्रिया शुरू होने पर ऐसी आशंका फिर गहरा गई है।
उम्र का विवाद खत्म, अब नियमित अदालत में मुकदमा
कपसाड़ कांड में आरोपी पारस सोम की उम्र को लेकर भी कानूनी विवाद चला था। आरोपी पक्ष ने उसे घटना के समय नाबालिग बताया था। किशोर न्याय बोर्ड ने मेडिकल जांच के आधार पर उसे बालिग माना। 10 जून, 2026 को बोर्ड के फैसले के बाद मामला नियमित अदालत में चलने का रास्ता साफ हुआ। 8 अगस्त को सेशन कोर्ट ने भी आरोपी को बालिग मानने के फैसले को बरकरार रखा।
गवाह तय करेंगे केस की दिशा व दशा
अब मुकदमे की सुनवाई में अभियोजन पक्ष आरोपों के समर्थन में गवाहों और अन्य साक्ष्यों को पेश करेगा। गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद बचाव पक्ष को उनसे जिरह करने का अवसर मिलेगा। अदालत सभी साक्ष्यों और कानूनी दलीलों पर विचार करने के बाद आगे की कार्रवाई करेगी।