HomeTrendingरूस में स्टडी वीजा पर गए अक्षय हुए लापता

रूस में स्टडी वीजा पर गए अक्षय हुए लापता

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परिजन के अनुसार रूसी सेना में जबरन भर्ती किया, एक जुलाई को घायल हुआ था


अमरोहा। फतेहपुर छीतरा गांव के अक्षय(24) रूस में स्टडी वीजा पर थे। उन्हें रूसी सेना में जबरन भर्ती कर यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर भेजा गया, जहां से वे लापता हैं। 1 जुलाई को घायल होने के बाद 10 दिन से उनका कोई सुराग नहीं मिला। परिजनों ने सरकार से अक्षय को भारत वापस लाने की अपील की है।

अक्षय के माता-पिता बीना और रणधीर सिंह ने बताया कि वह दो साल पहले रशियन भाषा सीखने रूस गए थे। कोर्स के बाद वीजा बढ़वाकर केएफसी में पार्ट-टाइम काम करते थे। यहीं ‘अलीशा’ नाम की एजेंट ने उन्हें रूसी नागरिकता और अच्छे वेतन का झांसा देकर सेना में शामिल करवाया।

परिजनों का आरोप है कि अक्षय को सिर्फ सुरंग बनाने का काम देने का भरोसा दिया गया था, पर धोखे से यूक्रेन के अग्रिम मोर्चे पर भेज दिया गया। 1 जुलाई को तैनाती के दौरान वे गंभीर रूप से घायल हुए और सैन्य यूनिट में इलाज के लिए भर्ती कराए गए। पिता रणधीर सिंह ने बताया कि 24 सितंबर के बाद से बेटे का फोन बंद है और उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।

अमरोहा के बछरायूं थाना क्षेत्र के गांव फतेहपुर छीतरा निवासी स्टडी वीजा पर रूस गए 24 वर्षीय अक्षय के जबरन रूसी सेना में भर्ती होकर यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर लापता होने से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। 1 जुलाई को युद्ध के दौरान घायल हुए अक्षय का बीते 10 दिनों से कोई सुराग न मिलने से परेशान परिजनों ने केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय से उसे सकुशल भारत वापस लाने की गुहार लगाई है। साथ ही माता पिता ने हाथ जोड़कर पीएम मोदी और सीएम योगी से बेटे को वापस भारत लाने की अपील की है।

अक्षय की माता बीना और पिता रणधीर सिंह ने बताया कि अक्षय दो वर्ष पूर्व रशियन भाषा सीखने के उद्देश्य से स्टडी वीजा पर रूस गया था। तीन माह का कोर्स पूरा करने के बाद उसने अपने वीजा की अवधि बढ़वा ली और एक प्रसिद्ध रेस्टोरेंट केएफसी में पार्ट-टाइम जॉब करने लगा। इसी दौरान रेस्टोरेंट में उसकी मुलाकात ‘अलीशा’ नामक एक महिला एजेंट से हुई। आरोप है कि अलीशा ने अक्षय को रूसी नागरिकता और मोटे वेतन का झांसा देकर सेना में शामिल करवा दिया।

परिजनों का कहना है कि अक्षय को केवल टनल (सुरंग) बनाने और गड्ढे खोदने के काम का आश्वासन दिया गया था, लेकिन धोखे से उसे यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के अग्रिम मोर्चे पर झोंक दिया गया। 1 जुलाई को अग्रिम मोर्चे पर तैनाती के दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसके बाद उसे सैन्य यूनिट में इलाज के लिए भर्ती कराया गया।

अक्षय के पिता रणधीर सिंह ने अत्यंत भावुक होकर बताया कि 24 सितंबर के बाद से बेटे का फोन पूरी तरह बंद आ रहा है और उससे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। घर में मोबाइल की हर घंटी बजते ही परिजनों का कलेजा कांप उठता है कि शायद बेटे की कोई खबर आई हो। पीड़ित परिवार दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय और रूसी दूतावास के चक्कर काटकर गुहार लगा चुका है, किंतु अभी तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।

परिजनों ने प्रशासनिक अधिकारियों व भारत सरकार से हस्तक्षेप कर अक्षय की सुरक्षित वतन वापसी की मांग की है। साथ ही अब पिता और भाई ने ठाना है कि वह अब खुद यूक्रेन जाएंगे। जिसके लिए उन्होंने बीजा बनवाने के लिए अपलाई कर दिया है।

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