श्री राम चरित मानस ज्ञान यज्ञ का द्वितीय दिवस
शारदा रिपोर्टर मेरठ। शुभम करोति फाउंडेशन द्वारा पंचवटी कॉलोनी मवाना रोड स्थित आभा मानव मंदिर के प्रांगण में गोस्वामी तुलसीदास जयंती के पावन अवसर पर श्री राम चरित मानस ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिवस की कथा सम्पन्न हुई।
कथाव्यास महानिवार्णी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद सरस्वती जी द्वारा रामचरित मानस के बालकाण्ड पर तात्विक प्रवचन दिए गए। कथा व्यास ने कहा कि- माता पार्वती ने भगवान शिव से निर्गुण निराकार ब्रह्म द्वारा सगुण साकार मनुष्य शरीर में राम अवतार लेने के हेतु पूछा। भगवान शिव ने भगवान के अवतार के मुख्य हेतु क्रमश: अधर्म के नाश- धर्म की स्थापना, ब्राह्मण-देवताओं- गौ एवं पृथ्वी की रक्षा, सनकादिक ऋषियों द्वारा जय विजय को श्राप, सती वृंदा के श्राप, मनु – शतरूपा के तप, एवं देवर्षि नारद श्राप बताए। नारद मोह की कथा का विस्तार से वर्णन किया।
उन्होंने कहा की – परमात्मा के निरूपाधिक और सोपाधिक दो स्वरूप हैं। ब्रह्म माया रहित और ईश्वर माया उपाधि सहित होते हैं। सोपाधिक ईश्वर जगत के सृजन , पल एवं संहार के हेतु बन जाते हैं। सोपाधिक ब्रह्म की साधना के 5 साधन क्रमश: नाम रूप लीला गुण एवं धाम हैं। सोपाधिक ब्रह्म की उपासना के माध्यम से निरूपाधिक ब्रह्म का साक्षात्कार हो जाता है। भगवान भक्त के हित, उत्कर्ष और उद्धार के लिए अवतार लेते हैं। ध्यानयोग के द्वारा वासनाक्षय, मनोनाश एवं तत्व ज्ञान होता है। आचार्य के द्वारा दी गई विद्या ही शिष्य को आत्मज्ञान रूपी फल प्रदान करती है। ज्ञान के मार्ग में बढ़ने के लिए गुरु आश्रय अति आवश्यक है। भगवान के यश का गायन करने एवम चिंतन करने से साधक में मोक्ष की पात्रता उत्पन्न होती है। कर्म, ज्ञान एवं भक्ति में निष्कामता आने से कर्मयोग, भक्तियोग एवं ज्ञान योग बन जाते है, ऐसा होने पर आत्मबोध में देर नहीं होती।
व्यास पूजन धनपाल सिंह एवं संतोष सिंह ने किया। सुरेश चंद गोविल, आभा गोविल, आर. एस. पी. एस. बरौनिया, आशा बरौनिया, एम. एल. अग्रवाल सुभाष शर्मा, कन्हैया शर्मा, सुशील बंसल आदि उपस्थित रहे।