सीसीएसयू के शिक्षा विभाग में संकाय विकास कार्यक्रम
शारदा रिपोर्टर मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के शिक्षा विभाग एवं सेंट्रल इंस्टीट्यूट आॅफ एजुकेशनल टेक्नोलॉजी, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में 12 से 14 अगस्त 2026 तक आयोजित तीन दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम के द्वितीय दिवस का आज सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय शिक्षकों, शिक्षक-प्रशिक्षकों एवं प्रशिक्षु शिक्षकों के लिए सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा उभरती हुई प्रौद्योगिकियां रखा गया है।
कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों, शिक्षक-शिक्षकों एवं प्रशिक्षु शिक्षकों को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, संवर्धित वास्तविकता, आभासी वास्तविकता और मेघ संगणन जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के प्रभावी एवं व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराना तथा उनकी डिजिटल दक्षताओं का विकास करना है।
उन्होंने प्रतिभागियों को दीक्षा मंच की प्रमुख विशेषताओं, उपयोगिता तथा उपलब्ध शैक्षिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग से परिचित कराया। साथ ही व्यावहारिक गतिविधियों एवं अभ्यासों के माध्यम से प्रतिभागियों को मंच के सरल, प्रभावी एवं उपयोगी प्रयोग का प्रत्यक्ष अनुभव कराया गया। उनके सत्र ने शिक्षकों एवं प्रशिक्षु शिक्षकों को डिजिटल संसाधनों के अधिकतम उपयोग के लिए प्रेरित किया। द्वितीय सत्र में प्रो. रजनी रंजन, सेंट्रल इंस्टीट्यूट आॅफ एजुकेशन, दिल्ली विश्वविद्यालय, नई दिल्ली ने मिश्रित अधिगम एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षण प्रणालियों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में तीव्र गति से हो रहे तकनीकी विकास के कारण शिक्षा की आवश्यकताएं भी निरंतर बदल रही हैं। उन्होंने व्यक्तिगत, लचीले एवं शिक्षार्थी-केंद्रित अधिगम की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियां शिक्षार्थियों की विविध आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण को अधिक प्रभावी एवं वैयक्तिकृत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
तृतीय सत्र में प्रो. भारती, सेंट्रल इंस्टीट्यूट आॅफ एजुकेशनल टेक्नोलॉजी, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली ने समावेशी शिक्षा के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि समावेशी शिक्षा के उद्देश्यों को प्रभावी रूप से प्राप्त करने के लिए विद्यालयों एवं कक्षा-कक्षों को अधिक समावेशी, संवेदनशील एवं सभी शिक्षार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना आवश्यक है। उन्होंने विभिन्न हस्तगत गतिविधियों एवं व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से प्रतिभागियों को समावेशी शिक्षण की प्रभावी रणनीतियों से अवगत कराया।