दरगाह हजरत शाह मियां नीम वाले के नाम से मजार बनाई, 312 वर्गमीटर बंजर भूमि होगी कब्जा मुक्त
संभल। सरकारी बंजर भूमि पर बने इमामबाड़ा और हजरत शाह मियां नीम मजार को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। दो बुलडोजर और एक पोकलैंड मौके पर पहुंच गई है। तहसीलदार न्यायालय के बेदखली आदेश के अनुपालन में शुक्रवार को बुलडोजर और पोकलेन मशीन की मदद से अतिक्रमण हटाया जाएगा। इस दौरान भारी पुलिस बल और पीएसी तैनात है।
प्रशासन के अनुसार, गाटा संख्या 765 की कुल 0.295 हेक्टेयर (2950 वर्गमीटर) भूमि में से 0.0312 हेक्टेयर (312 वर्गमीटर) बंजर भूमि पर अवैध निर्माण किया गया है। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा 67 के तहत तहसीलदार न्यायालय ने 12 जुलाई 2026 को बेदखली का आदेश जारी किया था।
हल्का लेखपाल ने 2 मई 2026 को अपनी रिपोर्ट में बताया था कि अज्ञात व्यक्तियों ने सरकारी बंजर भूमि पर इमामबाड़ा और मजार का निर्माण कर कब्जा कर लिया है। इसी रिपोर्ट के आधार पर तहसीलदार न्यायालय में वाद दायर किया गया, जिसके बाद बेदखली के आदेश पारित किए गए।
कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बुलडोजर और पोकलेन मशीन के साथ 50 पीएसी-आरआरएफ जवानों और स्थानीय पुलिस बल को तैनात किया गया है। तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने नायब तहसीलदार अरविंद कुमार और शुभम प्रताप सिंह को कार्रवाई का प्रभारी बनाया है। राजस्व विभाग की टीम भी मौके पर मौजूद रहेगी।
ग्रामीणों के अनुसार, इमामबाड़ा और मजार का निर्माण करीब 50 वर्ष पहले हुआ था। ग्राम प्रधानपति जाने आलम ने बताया कि संबंधित भूमि सरकारी है और निर्माण के समर्थन में कोई वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। इसी कारण प्रशासन राजस्व अभिलेखों के अनुसार भूमि को कब्जा मुक्त कराने की कार्रवाई कर रहा है।
शुक्रवार सुबह 11:50 बजे से इमामबाड़ा और हजरत शाह मियां नीम मजार को ढहाया जा रहा है। 5 बुलडोजर और एक पोकलेन मशीन तोड़ने में लगी हैं। अब तक इमामबाड़े का शटर तोड़ दिया गया है। मौके पर 50 पुलिसकर्मी तैनात हैं। ग्रामीणों के वहां आने पर रोक लगा दी गई है।
प्रशासन के अनुसार, करीब 50 साल पहले सरकारी बंजर जमीन के 3262 वर्गमीटर (26 बिसवा) क्षेत्र पर कब्जा किया गया था। इनमें 2950 वर्गमीटर में इमामबाड़ा और 312 वर्गमीटर में मजार बनाई गई थी। इसी साल 2 मई को लेखपाल ने तहसीलदार कोर्ट में इसकी शिकायत की थी।
कोर्ट ने इमामबाड़ा और मजार की देखरेख करने वालों से इसके दस्तावेज मांगे थे, लेकिन वे कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सके। इसके बाद 12 जुलाई को कोर्ट ने इमामबाड़ा और हजरत शाह मियां नीम मजार को हटाने का आदेश दिया।