HomeTrendingकड़ी सुरक्षा में धूमधाम से निकाली गई भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा,...

कड़ी सुरक्षा में धूमधाम से निकाली गई भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा, जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत

-

मेरठ। गुरुवार को भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी जी की रथ यात्रा हर्षोल्लास के साथ निकाली गई। सदर थाने के पीछे श्री बिल्वेश्वर नाथ महादेव मंदिर प्रांगण से रथ यात्रा का शुभारंभ हुआ। साढ़े चार कुंतल चांदी से तैयार हुए रथ में भगवान जगन्नाथ के साथ भाई बलदेव व बहन सुभद्रा विराजमान हुई। भगवान का पूजन मंदिर समिति के सदस्यों और कैंट विधायक अमित अग्रवाल ने किया। जिसके बाद विशेष आरती की गई।

भगवान जगन्नाथ मंदिर से शुरू होकर रथ यात्रा भैंसाली मैदान, दाल मंडी, बैंकर्स स्ट्रीट व सदर थाना, सदर बाजार, चौक बाजार, बांबे बाजार, हनुमान चौक, आबूलेन, फव्वारा चौक से होते हुए गंज बाजार, ढोलकी मोहल्ला व अंत में वापस मंदिर पर आकर संपन्न होगी। रथ में राम दरबार के साथ मीठे चावल का प्रसाद वितरण केंद्र रहा। रथ यात्रा में प्रसाद के लिए लगभग 160 वितरण केंद्र ठेले के रूप में शामिल हुए। प्रसाद के रूप में विभिन्न ठेलों पर आइसक्रीम, मीठे चावल, कुल्फी, चाट, आम, शिकंजी, शीतल पेय व अन्य खाद्य सामग्री वितरित की गई।समिति के अध्यक्ष विजय गोयल व कोषाध्यक्ष पवन गर्ग ने बताया कि आषाढ़ मास में शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को परंपरागत रूप से उड़ीसा पुरी में भव्य जगन्नाथ रथ यात्रा निकाली जाती है। ठीक इसी दिन अपने शहर में भी रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है। दरअसल, मेरठ में भगवान जगन्नाथ जी की ऐतिहासिक रथयात्रा (बिलकेश्वर महादेव मंदिर) को लेकर विवाद मंदिर की कमेटियों के बीच वर्चस्व और पुजारियों के अधिकारों को लेकर है। हालांकि, इस विवाद के प्रमुख कारण है। मंदिर समिति का विवाद की बात करें तो शहर की 116 साल पुरानी इस रथयात्रा को लेकर मंदिर की दो कमेटियों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। जिसके चलते विवाद बढ़ने के कारण कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने हेतु प्रशासन ने मंदिर की व्यवस्था अपने हाथ में ले ली है। सदर तहसीलदार और सदर थाना प्रभारी को रिसीवर नियुक्त किया गया है। प्रशासन के फैसले के अनुसार, वर्षों से रथ पर सवार होने वाले मुख्य पुजारियों को इस बार रथ पर बैठने नहीं दिया गया। उन्हें केवल पूजा-अर्चना तक ही सीमित रखा गया, जिस पर पुजारियों ने आपत्ति जताई। वहीं, इस मामले में पुजारी पक्ष की राशि शर्मा का कहना था कि, प्रशासन ने यह निर्णय सुनाया कि दोनों पुजारी रथ पर सवार नहीं होंगे और केवल पूजा-अर्चना ही संपन्न कराएंगे। यह संपूर्ण कार्रवाई बिना किसी उचित लिखित आदेश और प्रशासनिक दबाव में की जा रही है, जो पूरी तरह से गलत है। यह सनातन का अपमान करने का काम किया जा रहा है।

Related articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

14,000FansLike
6,000SubscribersSubscribe

Latest posts