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जमीन आवंटन में गड़बड़ी पर एसडीएम सस्पेंड –

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 तहसीलदार रहते हुए 1144 बीघा जमीन का गलत पट्टा किया, अब सुल्तानपुर में तैनात


संभल। 1144 बीघा झाऊ श्रेणी की भूमि के गलत पट्टा आवंटन मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। गुन्नौर तहसील के तत्कालीन तहसीलदार और वर्तमान में सुल्तानपुर के एसडीएम करम सिंह चौहान को उत्तर प्रदेश शासन ने निलंबित कर दिया है। संभल पुलिस-प्रशासन उनकी गिरफ्तारी की तैयारी कर रहा है।

इससे पहले, 3 जुलाई को इस मामले में बर्खास्त एसडीएम ओमवीर सिंह, पूर्व डीजीसी जय भारद्वाज और पूर्व ग्राम प्रधान सहित छह लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। लेखपाल स्वाति शर्मा की शिकायत पर कुल 19 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।

यह पूरा मामला संभल जनपद की गुन्नौर तहसील के असदपुर और सुलेखा सहित कई गांवों में गंगा किनारे स्थित झाऊ श्रेणी की सरकारी भूमि के कथित अवैध आवंटन से संबंधित है। थाना पुलिस ने लेखपाल स्वाति शर्मा की शिकायत पर आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 34 और 120-इ के तहत मामला दर्ज किया है।

दर्ज रिपोर्ट में रिटायर्ड एसडीएम ओमवीर सिंह (निवासी निरंजनपुरी, अलीगढ़), तत्कालीन तहसीलदार करम सिंह (वर्तमान एसडीएम सुलतानपुर), तत्कालीन ग्राम प्रधान विक्रांत (गांव असदपुर), पूर्व डीजीसी (राजस्व) जय भारद्वाज (कस्बा गंवा, रजपुरा), ग्राम पंचायत सदस्यों प्रवीण कुमार, संतोष कुमार, जलधारा, मोहरश्री, किशनलाल, देवेंद्र कुमार, लेखपाल सर्वेश कुमारी, ओमकार सिंह व अमित कुमार, रिटायर्ड कानूनगो राजवीर सिंह रक्षपाल सिंह, रिटायर्ड चकबंदी अधिकारी महेंद्र सिंह, तत्कालीन चकबंदी लेखपाल भीमराव सिंह, तत्कालीन चकबंदी कर्ता मनवीर सिंह, सतीश गुप्ता और ओमवीर सिंह को नामजद किया गया है। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक अखिलेश प्रधान कर रहे हैं।

लेखपाल स्वाति शर्मा ने आरोप लगाया कि ग्राम सुखैला की लगभग 71.55 हेक्टेयर (1000 बीघा) झाऊ श्रेणी की भूमि, जो चकबंदी प्रक्रिया के अधीन थी, उसमें वर्ष 2007 के बाद फर्जी तरीके से अभिलेखों में प्रविष्टियां की गईं। इस मामले में वर्ष 2018 में भी तत्कालीन अधिकारियों-कर्मचारियों और 58 अपात्र लाभार्थियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसके बाद फर्जी प्रविष्टियां निरस्त कर दी गई थीं।

आरोप है कि इसके बावजूद वर्ष 2019 में तत्कालीन उपजिलाधिकारी द्वारा 162 लाभार्थियों के पक्ष में पुन: पट्टा स्वीकृत कर दिया गया। बाद में जांच में भूमि के क्षेत्रफल और लाभार्थियों की संख्या में गंभीर विसंगतियां सामने आई। वर्ष 2021-22 में संशोधन की कार्रवाई हुई, लेकिन आरोप है कि राजस्व संहिता-2006 की धारा 119 से 126 के प्रावधानों, विशेषकर धारा 125 के तहत खुली ग्राम सभा, सहमति अथवा लॉटरी की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

तहरीर में कहा गया है कि वर्ष 2023 में 17 अपात्र लाभार्थियों के पट्टे निरस्त होने के बावजूद अभिलेखों में 145 लाभार्थियों के नाम दर्ज रहे और किसी को वास्तविक कब्जा भी नहीं दिलाया गया। आरोप है कि पूरी प्रक्रिया कूटरचित दस्तावेजों और नियमों की अनदेखी कर पूरी की गई।

इस प्रकरण की जांच समिति ने 4 जून 2026 को जिलाधिकारी संभल को अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों एवं अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध वैधानिक और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की थी। इसी के आधार पर थाना गुन्नौर में बीती 02 जुलाई को एफआईआर दर्ज की गई।

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