परिजनों ने लावारिस लाश को गिरधर की बताकर किया था बवाल
गाजियाबाद। 42 साल के गिरधर की हत्या का आरोप लगाकर परिजनों ने जमकर बवाल काटा। कौशांबी थाना घेरा, पुलिस ने हत्या का केस दर्ज किया। मसूरी नहर में मिली लावारिस लाश को गिरधर की बताई। अब गिरधर अपने घर लौट आया है। जिसकी परिजनों ने तेरहवीं भी कर दी। अब पुलिस मानसिक रुप से बीमार युवक से पूछताछ कर रही है।
गाजियाबाद के कौशाम्बी थाना क्षेत्र के वैशाली कल्पना अपार्टमेंट में रहने वाले गिरधर सिंह बिष्ट (42 साल) का 16 मई को स्थानीय दुकानदारों से झगड़ा हुआ। पुलिस ने युवक को शांतिभंग में डासना जेल भेज दिया। 21 मई को डासना जेल से इसकी रिहाई हुई, लेकिन जेल से रिहा होने के बाद वह घर नहीं पहुंचा।
13 जून को मसूरी थाना क्षेत्र मेंनहर में एक लावारिस शव मिला। जिसकी पहचान परिजनों ने गिरधर के शव के रूप में की। जिसके बाद कौशांबी थाने पर जमकर हंगामा हुआ। परिजनों ने पुलिस पर हत्या के आरोप लगाए। मसूरी थाने में गिरधर की हत्या का अज्ञात में मुकदमा भी दर्ज हो गया।
पूरे प्रकरण में अब परिजनों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। गिरधर मानसिक रूप से बीमार रहता है। जो पुलिस को भी अलग अलग कहानी बता रहा है। कभी पीएम तो कभी सीएम को नाम लेकर हंसने लगा है। पुलिस के डर से वह खुद को मानसिक बीमार भी बताने की कोशिश कर रहा है। सवाल यह है कि आखिर इतने दिन वो कहां और क्यों गायब रहा ? परिजनों ने किसी और के शव को उसका बता कर शिनाख्त क्यों की ? और वो वह शव यदि गिरधर कर नहीं था तो फिर किसका था?
शव की पहचान होने के बाद 14 जून को परिजनों और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में कौशांबी थाने पहुंचे, उन्होंने पुलिस और जेल प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए थाने का घेराव किया और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। सूचना पर पहुंचे एसीपी इंदिरापुरम अभिषेक श्रीवास्तव ने लोगों को समझाकर शांत कराया और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया।
मृतक की मां देवकी ने बताया कि वह कैंसर से पीड़ित हैं और उनके पति का पहले ही निधन हो चुका है। उनका आरोप है कि उनके इकलौते बेटे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है। परिवार को आशंका है कि युवक की हत्या कर शव को कहीं फेंक दिया गया। परिजनों ने पूरे मामले की गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।