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यूपी की अंतिम मतदाता सूची जारी, फाइनल लिस्ट में 13.39 करोड़ 84 हजार नाम

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– फाइनल लिस्ट में 13.39 करोड़ 84 हजार नाम, मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने किया जारी।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में साढ़े पांच माह चले विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) अभियान के बाद अंतिम मतदाता सूची शुक्रवार को जारी कर दी गई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने इसको जारी किया। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यूपी में अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई है। फाइनल लिस्ट में 13.39 करोड़ 84 हजार के नाम हैं। उत्तर प्रदेश की सूची में 84 लाख मतदाता बढ़े हैं। प्रदेश में छह करोड़ से अधिक महिला मतदाता हैं।

 

 

विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े

विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण कार्यक्रम-2026 की घोषणा 27.10.2025 को की गई। गणना चरण 04.11.2025 से 26.12.2025 तक चली। मसौदा मतदाता सूची का प्रकाशन 06.01.2026 को हुआ।
दावा एवं आपत्ति अवधि 06.01.2026 से 06.03.2026 तक रही। नोटिस चरण (सुनवाई, सत्यापन) एवं दावे और आपत्तियों का निस्तारण 06.01.2026 से 27.03.2026 तक किया गया।

मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 10.04.2026 को हुआ।

06 जनवरी, 2026 को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में कुल मतदाता 12,55,56,025 हैं। पुरुष मतदाताओं की संख्या 6,88,43,159 (54.83%) है। महिला मतदाताओं की संख्या 5,67,08,747 (45.17%) है। तृतीय लिंग मतदाताओं की संख्या 4,119 (0.01% से कम) है। 18-19 आयु वर्ग के मतदाताओं की संख्या 3,33,981 (0.27%) है।

अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, प्रयागराज में मतदाताओं की संख्या में सर्वाधिक वृद्धि हुई है। यहां पर 3 लाख 29 हजार 421 मतदाता बढ़े। वहीं, लखनऊ में 2 लाख, 85 हजार 961 मतदाता, बरेली में 2 लाख 57 हजार 920 मतदाता, गाजियाबाद में 2 लाख 43 हजार 666 मतदाता और जौनपुर में 2 लाख 37 हजार 590 मतदाताओं की वृद्धि हुई है।

इसके पहले, 6 जनवरी को 12.55 करोड़ मतदाताओं की मसौदा सूची जारी की गई थी। उसके बाद 6 मार्च तक लोगों से इस ड्राफ्ट मतदाता सूची पर दावे व आपत्तियां ली गईं। कुल 86.69 लाख लोगों ने मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने के लिए फॉर्म-6 भरा। वहीं 3.18 लाख लोगों ने नाम कटवाने के लिए फॉर्म-7 भरा है। मतदाता सूची में 1.04 करोड़ लोग ऐसे हैं जिनके नाम का मिलान माता-पिता, बाबा-दादी व नाना-नानी से न होने के कारण इन्हें नोटिस दिया गया था। वहीं 2.22 करोड़ लोग तार्किक विसंगति वाले थे।

 

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