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हम मिलकर भारत की नारी शक्ति को सशक्त करें : मोदी

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एजेंसी नई दिल्ली। महिला आरक्षण पर संदेश देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, हमारी नारी शक्ति देश की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती है। सितंबर 2023 में संसद ने सर्वसम्मति से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था। अब जरूरत है कि 2029 के लोकसभा चुनाव और आने वाले समय में राज्यों के विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के प्रावधानों के साथ कराए जाएं।

21वीं सदी की विकास यात्रा में हमारा भारत एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण की ओर आगे बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में हम अपने लोकतंत्र को और मजबूत करने वाली एक बड़ी पहल के साक्षी बनने वाले हैं। यह ऐसा अवसर है, जब समानता, समावेशन और जनभागीदारी के प्रति हमारी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता एक नए रूप में सामने आएगी। यह ऐसा समय है, जब हमारे देश की संसद को एक महत्वपूर्ण दायित्व निभाना है। उसे ऐसा कदम आगे बढ़ाना है, जो हमारे लोकतंत्र को अधिक व्यापक एवं और अधिक प्रतिनिधिक बनाए। संसद का यह निर्णय महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को नई शक्ति देगा और लोकसभा और विधानसभाओं संस्थाओं में उनका उचित स्थान सुनिश्चित करेगा।

यह क्षण इसलिए भी विशेष है, क्योंकि यह ऐसे समय में आ रहा है जब देश का वातावरण उत्सव, नवीनता और सकारात्मकता से भरा हुआ है। आने वाले दिनों में भारत के अलग अलग हिस्सों में अनेक पर्व मनाए जाएंगे। असम के लोग रोंगाली बिहू मनाने वाले हैं, और ओडिशा में महा बिशुबा पणा संक्रांति का उत्सव मनाया जाएगा। पश्चिम बंगाल में पोइला बैशाख के साथ बंगाली नववर्ष की शुरुआत होगी। केरलम में विषु पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा।

तमिलनाडु के लोग उत्सुकता से पुथांडु की प्रतीक्षा कर रहे हैं, तो पंजाब और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में लोगों को बैसाखी के पर्व का इंतजार है। हमारे ये पावन पर्व हर किसी में एक नई आशा का संचार करने वाले हैं। भारत के साथ-साथ दुनियाभर में इन त्योहारों को मनाने वाले सभी लोगों को मैं हृदय से शुभकामनाएं देता हूं। मैं ये कामना करता हूं कि ये दिव्य और पावन अवसर हम सभी के जीवन में सुख-समृद्धि लेकर आएं।

इसी दौरान 11 अप्रैल से महात्मा फुले की 200वीं जयंती के समारोह भी शुरू होंगे। 14 अप्रैल को हम भारतवासी डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती मनाएंगे। ये दोनों तिथियां हमें सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा के उन मूल्यों की भी याद दिलाती हैं, जिन्होंने आधुनिक होते भारत की दिशा तय की हैं।

इन्हीं प्रेरणादायी अवसरों के बीच, 16 अप्रैल को संसद की ऐतिहासिक बैठक होगी। महिला आरक्षण को लागू करने से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के बाद उसे पारित कराने के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है। इसे सिर्फ एक विधायी प्रक्रिया कहना इसके महत्व को कम करके आंकना होगा। यह भारतवर्ष की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है।

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