शारदा रिपोर्टर मेरठ। मंगलवार को राष्ट्रीय मानव एकता संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष आर के बौद्ध के नेतृत्व में विभिन्न समस्याओं को लेकर कमिश्नरी चौराहे पर प्रदर्शन किया गया। इस दौरान उन्होंने भारत सरकार को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी कार्यालय पर सौंपा।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि, सभी राज्यों सरकारों के सभी सरकारी कार्यालयों, विभागों एवं परियोजनाओं में ठेकेदारी प्रथा को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए। जो वेतन ठेका कर्मचारियों को ठेकेदार के द्वारा दिया जाता है उस वेतन को सरकार स्वयं अपने अधिकार से दें। क्योंकि, ठेकेदारी शोषण का दूसरा नाम है।
बताया कि, वह लोग आज ठेकेदारों के हाथ की कठपुतली बनकर रह जाते हैं। जो कभी भी अकारण काम से निकाले जाते हैं, बिना किसी कारण के एक ही कार्यालय में दो तरह के कर्मचारी एक नियमित, दूसरा ठेका पर। एक को सभी सुविधाएं, दूसरे को कुछ नहीं। यह न केवल असमानता को बढ़ावा देता है, बल्कि समाज में असंतोष, वर्ग संघर्ष और जाति-धर्म के आधार पर विभाजन का भी कारण बनता है। गरीब मजदूर तबका ठेकेदारों के हाथों की कठपुतली बन कर रह जाता है।
उन्होंने कहा कि, जिन लोगों के पास बोने जोतने की जमीन है, उन लोगों को छोड़कर। जो गरीब, दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक या आदिवासी परिवारों से आते हैं अधिकतर वही युवा ठेकेदार के अधीन काम करने को मजबूर हैं। उनका भविष्य ठेकेदार के हाथों में है। इसलिए यह मानवाधिकार का खुला उल्लंघन है। जिसके चलते हम सरकार से यह मांग करते हैं कि, ठेकेदारी प्रथा को तत्काल समाप्त किया जाए। सभी ठेके के कर्मचारियों को सरकारी विभागों में नियमित कर्मचारी के रूप में शामिल किया जाए। वेतन, भत्ते, पेंशन, चिकित्सा सुविधा सभी सरकारी नियमों के अनुसार सीधे सरकार द्वारा दिया जाए। कर्मचारी विभाग के अधीन हों, ठेकेदार के अधीन नहीं। उन्होंने कहा कि, यह मांग केवल एक वर्ग के लिए नहीं। बल्कि समाज के हर तबके के लिए है।