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Sunday, February 8, 2026
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Homeदेशमखदूमपुर गंगा घाट पर पर स्नान के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

मखदूमपुर गंगा घाट पर पर स्नान के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

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ज्येष्ठ दशहरा मेला शुरू, डीएम ने किया उद्घाटन, गंगा पूजन के साथ पौधरोपण और सफाई अभियान में लिया हिस्सा


शारदा रिपोर्टर मेरठ। मखदूमपुर गंगा घाट पर दो दिवसीय ज्येष्ठ दशहरा मेले का आयोजन शुरू हो गया है। जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह, सीडीओ नूपुर गोयल, ब्लॉक प्रमुख नितिन पोसवाल और ग्राम प्रधान रितु चौधरी ने फीता काटकर मेले का उद्घाटन किया।
डीएम ने मां गंगा की पूजा-अर्चना की और हरि शंकरी वाटिका में पीपल का पौधा रोपा। उन्होंने क्षेत्रीय वन अधिकारी खुशबू उपाध्याय से पौधरोपण की जानकारी ली। इसके बाद गंगा घाट पर सफाई अभियान में भी हिस्सा लिया।

मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है। घाट पर एसडीआरएफ की टीम तैनात की गई है। महिला श्रद्धालुओं के लिए वस्त्र बदलने की अलग व्यवस्था की गई है। रात में रोशनी के लिए लाइटें लगाई गई हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए गंगा में बैरिकेडिंग की गई है। दो नावों पर गोताखोर और पुलिस कर्मी तैनात किए गए हैं।

खरखाली घाट पर भी प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। एसडीएम दीपक माथुर ने घाट का निरीक्षण किया। गंगा में जल स्तर अधिक होने के कारण यहां भी बैरिकेडिंग लगाई गई है। डीएम ने मेले में लगी दुकानों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने दुकानदारों से खाने की गुणवत्ता का ध्यान रखने को कहा और श्रद्धालुओं को अच्छी गुणवत्ता का सामान देने का निर्देश दिया।

वहीं दूसरी ओर हस्तिनापुर के मखदूमपुर घाट पर गंगा दशहरे के शुभ अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सूरज की पहली किरण के साथ ही हजारों श्रद्धालुओं ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाई और पवित्र जल से तन-मन को शुद्ध किया। परिवार संग आए भक्तों ने पिंडदान और पूजा-अर्चना भी की।

गंगा घाट तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब चार किलोमीटर का उबड़-खाबड़, धूलभरा रास्ता पार करना पड़ा। मोटरसाइकिल और छोटे वाहन रास्ते में धंस गए। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे तेज धूप में पैदल चलते दिखे, फिर भी किसी ने शिकायत नहीं की क्योंकि मंजिÞल मां गंगा थीं।
उद्घाटन तो हुआ लेकिन व्यवस्थाएं अधूरी रहीं

जिलाधिकारी द्वारा मेले का उद्घाटन तो कर दिया गया, परंतु मेला स्थल तक पहुंचने के रास्ते को दुरुस्त नहीं कराया गया। श्रद्धालुओं को गड्ढों, धूल और रेत से भरे रास्तों से गुजरना पड़ा। कई लोगों को बच्चों को गोद में उठाकर घाट तक लाना पड़ा।
हस्त नक्षत्र, सिद्धि योग और व्यतिपात
इस वर्ष गंगा दशहरे पर दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बने। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, हस्त नक्षत्र, सिद्धि योग और व्यतिपात योग का एक साथ आना कई दशकों बाद हुआ है। इस कारण गंगा स्नान, दान, जप, तप और व्रत का विशेष फल मिलने की मान्यता रही।
एक ही घाट पर जीवन और मृत्यु दोनों की पूजा
घाट पर कई परिवारों ने बच्चों के मुंडन संस्कार कराए तो वहीं अनेक लोगों ने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। गंगा किनारे बैठे पंडितों को श्रद्धालुओं ने आस्था से दान-दक्षिणा दी। यह दृश्य भारतीय परंपरा और संस्कृति की गहराई को दशार्ता है।
भक्ति के साथ सुरक्षा भी-पुलिस तैनात, चेतावनी जारी
भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया था। पुलिसकर्मी लगातार अनाउंसमेंट कर रहे थे कि श्रद्धालु गहरे पानी में न जाएं। घाट पर गोताखोर भी मौजूद रहे ताकि किसी आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके।

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