Homeउत्तर प्रदेशMeerutMeerut: छावनी क्षेत्र में प्यास बुझाने को नहीं मिल रहा पानी

Meerut: छावनी क्षेत्र में प्यास बुझाने को नहीं मिल रहा पानी

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शारदा रिपोर्टर मेरठ। भीषण गर्मी के बीच छावनी क्षेत्र में यदि किसी को प्यास लग जाए, तो उसे शुद्ध पेयजल नहीं मिलेगा। हालत यह है कि, अभी तक कैंट में पेयजल की व्यवस्थाएं जर्जर हैं। पब्लिक प्लेस, मार्केट, सरकारी अस्पताल और सरकारी आॅफिस में पेयजल की व्यवस्था ठीक नहीं है। नल और हैंडपंप खराब है और जो कुछेक ठीक नजर आते हैं, उनमें भी गंदा पानी निकल रहा है। पेयजल की समस्या के हर बिंदुओं को टटोलने के लिए शारदा एक्सप्रेस की टीम ने कैंट के विभिन्न इलाकों का निरीक्षण किया। लेकिन निरीक्षण के दौरान हालात बेहद निराशाजनक मिले। वहीं, कैंट बोर्ड द्वारा कही भी शुद्ध पानी की सप्लाई नहीं होने से लोगों में कैंट बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ खासी नाराजगी है।

मेरठ कैंट में तकरीबन पांच लाख जनसंख्या है। जिनकी प्यास को बुझाने के लिए सैंकड़ों नल, हैंडपंप और वाटर एटीएम लगाए गए हैं। लेकिन यह सभी केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। हालांकि, टैंक से जलापूर्ति होती है। लेकिन लोगों के अनुसार इसमें भी गंदा पानी आ रहा है।

मेरठ कैंट में सार्वजनिक स्थलों पर शुद्ध पेयजल की सुविधा बदहाल है। शुद्ध पानी के लिए आप घूमते रहिए, साफ पानी नहीं मिलेगा। जबकि, प्रमुख बाजारों में हैंडपंप और पानी की टोंटी की व्यवस्था की है। इनमें अधिकतर हैंडपंप और टोंटियां खराब हैं। पानी की टोंटियां सूखी पड़ी हैं। जबकि, अधिकांश इलाकों में पेयजल की व्यवस्था ही नहीं है। कई परिसरों में चिल्ड पानी के लिए वाटर एटीएम व कूलर लगे हैं, लेकिन संचालित नहीं हो रहे हैं।

सार्वजनिक स्थलों पर

हाइजीन के नाम पर शुद्ध पानी के बजाए गंदगी के बीच पेयजल की सुविधा मिल रही है। कैंट के पार्कों का भी कुछ ऐसा ही हाल हैं। पार्कों में लगे हैंडपंप जर्जर हैं। पानी की टोंटी सूखी हैं। कुल मिलाकर पार्कों में हरियाली तो है पर पीने का पानी नही।

पेयजल की नहीं रुक रही बर्बादी

एक तरफ तो साफ पीने का पानी मिलना मुश्किल हो रहा है। तो वहीं दूसरी तरफ पेयजल की बर्बादी एक आम सी बात हो गई है। लोगों के अनुसार हर साल गर्मियों की शुरूआत के साथ ही कैंट की अंडर ग्राउंड पाइप लाइन लीक होना शुरू हो जाती है। अब तक कई बार अंडर ग्राउंड पाइप लाइन लीक होने से पेयजल की भारी भरकम बबार्दी हो चुकी है। इसके बाद भी कई साल पुरानी जर्जर लाइन को बदलने का कष्ट कैंट बोर्ड नहीं उठा रहा है। जिसका खामियाजा कैंट वासियों को उठाना पड़ रहा है।

 

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