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Monday, January 12, 2026
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Homeउत्तर प्रदेशMeerutभाजपा की तेज रफ्तार से हांफ रहे विपक्षी दल !

भाजपा की तेज रफ्तार से हांफ रहे विपक्षी दल !

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– भाजपा का चल रहा तूफानी प्रचार, विपक्षी दल कर रहे अभी तक प्रत्याशी तैयार


अनुज मित्तल (समाचार संपादक)

मेरठ। लोकसभा चुनाव में भाजपा की तेज रफ्तार के पीछे विपक्ष हांफता नजर आ रहा है। हाल ये है कि भाजपा ने जहां अपने पहले से लेकर तीसरे चरण तक चुनाव का प्रचार तेज कर दिया है, तो विपक्षी दल अभी प्रत्याशी चयन में ही उलझे हुए हैं। ऐसे में इंडिया गठबंधन की चुनावी रणनीति को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।

यूपी में भाजपा के चुनाव प्रचार में यूं तो कई स्टार प्रचारक हैं। लेकिन मुख्य कमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संभाली हुई है। सभी लोकसभाओं में मुख्यमंत्री जहां लगातार प्रबुद्धजन सम्मेलन करते जा रहे हैं, तो उनके पीछे-पीछे चार-चार लोकसभाओं को रैली के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साध रहे हैं। इसके साथ ही प्रत्येक सीट पर नामांकन पत्र में प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री मौजूद रहते हैं। अब अमित शाह भी पश्चिमी यूपी के चुनाव मैदान में प्रचार की कमान संभालते हुए उतर चुके हैं। उनके पीछे-पीछे राजनाथ सिंह और अन्य केंद्रीय मंत्री तथा स्टार प्रचारक जनसभाएं और रोड शो के जरिए भाजपा का चुनावी माहौल बनाएंगे।

लेकिन अगर विपक्षी दलों को देखें तो यहां मैदान अभी पूरी तरह खाली है। बसपा का प्रचार छह अप्रैल से शुरू होगा। आकाश आनंद इसकी शुरूआत करेंगे। जबकि बसपा सुप्रीमो मायावती मेरठ में 23 अप्रैल को जनसभा करेंगी। इससे साफ है कि बसपा का मुख्य चुनाव प्रचार पहले चरण में नहीं बल्कि दूसरे चरण से शुरू होगा।

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में पूरी तरह अभी तक सूखा है। इसका बड़ा कारण ये है कि प्रत्याशी चयन में ही सपा को पसीने छूट रहे हैं। प्रत्याशियों के चयन को अंतिम रूप देने के चक्कर में अखिलेश यादव लखनऊ से बाहर ही नहीं निकल पा रहे हैं। जिस तरह अकेले अखिलेश यादव पूरी कवायद कर रहे हैं, उससे साफ है कि सपा के भीतर कहीं न कहीं गड़बड़ है। पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता या तो उन्हें सहयोग नहीं कर रहे हैं या फिर वह उनका सहयोग ले नहीं रहे हैं। यही कारण है कि पहले चरण के प्रत्याशी अपने मुखिया के कार्यक्रम को लेकर मशक्कत कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कुछ भी तय नहीं हो पा रहा है।

कांग्रेस में भी कुछ ऐसा ही है। यूपी में मात्र 17 सीटों पर चुनाव लड़ रही कांग्रेस भी प्रत्याशियों को चयन को लेकर भारी माथापच्ची में जुटी है। जिस कारण कांग्रेस के प्रत्याशी भी अपने नेता राहुल और प्रियंका की बाट जोह रहे हैं।

भाजपा का संगठनात्मक ढांचा पड़ रहा भारी

भाजपा का संगठनात्मक ढांचा बेहद मजबूत है। यही कारण है कि वह विपक्षी दलों पर भारी पड़ रहा है। हालांकि पूर्व में बसपा संगठन भी मजबूत था, लेकिन पिछले एक दशक में उसमें लगातार कमजोरी आयी है। पुराने वरिष्ठ नेता बसपा का दामन छोड़ चुके हैं और नये नेताओं में वह कुशलता नजर नहीं आ रही है। सपा में भी मुलायम सिंह यादव के जाने के बाद संगठन स्तर पर बेहद कमजोरी आयी है। जबकि यूपी में कांग्रेस तो लगभग सिमट कर रह गई है। यही कारण है कि भाजपा अपने कुशल चुनाव प्रबंधन के कारण इस वक्त सबसे आगे रहते हुए भारी पड़ रही है।

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