– बीमारी का बहाना बनाकर छुट्टी ली, जांच में खुली पोल।
झांसी। दरोगा भर्ती परीक्षा देने गए 23 सिपाही सस्पेंड कर दिए गए हैं। इन सभी ने बीमारी का बहाना बनाकर छुट्टी ली और परीक्षा देने पहुंच गए। छुट्टी के बाद वापस आकर ड्यूटी जॉइन की। विभाग ने आंतरिक जांच कराई तो पोल खुल गई।

एसएसपी बीबी जीटीएस मूर्ति ने बिना विभागीय इजाजत लिए और झूठ बोलकर गलत तरीके से छुट्टी लेने को गंभीर अनुशासनहीनता माना। उन्होंने निलंबन की कार्रवाई के साथ ही विभागीय जांच के आदेश दे दिए। इतनी बड़ी संख्या में सिपाहियों के निलंबन से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
दरअसल, 14 और 15 मार्च को यूपी पुलिस में दरोगा पद की सीधी भर्ती के लिए लिखित परीक्षा कराई गई थी। परीक्षा देने के लिए किसी सिपाही ने 2 तो किसी ने 3 या 4 दिन की छुट्टी ली। ज्यादातर सिपाहियों ने एक महीने पहले ही छुट्टी की अर्जी दे दी थी। इस दौरान होली, ईद जैसे अहम आयोजन भी पड़े। हालांकि, वजह बीमारी होने की वजह से छुट्टियां अप्रूव हो गईं।
यूपी पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह के बताया कि परीक्षा फॉर्म भरने के लिए इजाजत जरूरी नहीं होती, लेकिन परीक्षा देने के लिए अनुमति ली जाती है। इसके लिए ली जाने वाली छुट्टी संबंधित पुलिसकर्मियों को साल भर में मिलने वाली छुट्टी से कटती है। अगर किसी ने झूठ बोल कर छुट्टी ली है तो उसे अनुशासनहीनता माना जाता है। विभागीय जांच होती है।
उन्होंने बताया कि जांच में दोषी पाए जाने पर कैरेक्टर रोल में बैड इंट्री दर्ज की जाती है। यानी संबंधित पुलिसकर्मी की सर्विस बुक में निगेटिव पॉइंट जुड़ जाता है। सजा के तौर पर पुलिसकर्मी को तीन साल तक प्रमोशन नहीं मिल सकता। उसे कोई अहम जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती। अगर सिपाही है, तो उसे थाने के बजाय पुलिस लाइन में ही तैनात रखा जाता है।

