नवरात्र में भगवती कामाख्या की पूजा व हवन देगा लाभ
चैत्र शुक्लादिमार्तण्डोदयवारेश्वरो नृपः ।
मेषार्कदिनपो मन्त्री तदाद्यो वर्षपः परे।।
आर्द्राकर्कतुलाचाप मकारार्कदिनेश्वराः ।
मेघशस्यरसा धान्यनिरसेशाः शुभैः शुभम्।।
अर्थात – चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन सूर्योदय के समय जो वार होता है वही वर्ष में संवत्सर का राजा होता है, सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के दिन जो वार होता है वही संवत्सर का मंत्री होता है, सूर्य के आर्द्रा प्रवेश, कर्क, तुला, धनु और मकर संक्रांति के दिन जो वार होते हैं उसी ग्रह अनुसार क्रमशः बारिश, अनाज, सुखाड़, धान का फल कहना चाहिए।

आचार्य प्रदीप गोस्वामी | इस संवत्सर का नाम रौद्र है। नाम से ही भयंकर प्रतीत होने वाले संवत्सर में काम भी भयंकर होंगे। इस संवत्सर के मंत्री मंगलदेव है जो कि 2 मई तक अस्त रहेंगे। वर्तमान में मंगलदेव कुंभ राशि में स्थित है। कुंभ राशि में मंगल मारक होते हैं। वर्तमान में अस्त होने के बावजूद राहु के साथ युति और शतभिषा नक्षत्र में होने के कारण मंगलदेव के नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहे है। ज्ञातव्य है कि राहु जिस भी ग्रह के साथ बैठते हैं उनके फल में वृद्धि कर देते हैं। फलस्वरुप जगह जगह अग्निकांड, युद्ध, अत्यधिक गर्मी, दुर्घटनाएं हो रही है। 2 मई तक ऐसी घटनाएं होते रहेंगी। विशेषकर संसार का पश्चिम दिशा इससे ज्यादा प्रभावित रहेगा। हमारे देश के दक्षिण- पश्चिम राज्यों में भी किसी बड़े दुर्घटना की संभावना है। 2 अप्रैल को मंगलदेव के मीन राशि में जाने के बाद इन दुर्घटनाओं में कमी देखने को मिलेगी।
हमारे संवत्सर के राजा गुरुदेव सौम्य ग्रह है किंतु वह अभी मिथुन राशि में स्थित है। मिथुन राशि में गुरुदेव मारक और बाधक होते हैं इसलिए गुरुदेव अपने उच्च राशि कर्क में जाने के पश्चात ही शुभ प्रभाव देंगे।
उपाय – जिनके जन्म कुंडली में मंगलदेव या गुरुदेव नीच, अस्त या अंश में कमजोर या दशा चल रही हो वह विशेष सतर्क हो जाएं। अनावश्यक यात्राएं करने से बचें। ऐसी चीजें जिससे आग लगने की संभावना हो, उससे सुरक्षित रहें।
परिवार में किसी ना किसी का ऐसा योग होगा ही, ऐसी संभावना रहेगी। इस समय नवरात्र में भगवती कामाख्या के कवच श्री दुर्गा सप्तशती पाठ सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का पाठ करें हवन अनुष्ठान अवश्य कीजिए । भगवती कामाख्या के कवच श्री दुर्गा सप्तशती पाठ से मंगलदेव और राहुदेव दोनों आपके लिए लाभकारी रहेंगे। जिन्हें बहुत अधिक कष्ट हो वह श्री हनुमान जयंती तक हवन करें या करवे
नवरात्र उपरांत भी हर मंगलवार को तथा शनिवार को अवश्य हवन करें। कम से कम सप्ताह में एक दिन अवश्य हवन करें।

उपरोक्त सामग्री से भगवती कामाख्या के कवच में उपस्थित मातृकाओं के निमित्त भी आहुति दी जा सकती है। इससे कवच भी सिद्ध हो जायेगा व रक्षा भी हो जायेगा।
नये संवत्सर में भगवती जगदंबा हम सभी की रक्षा करें, माता बगलामुखी ब्रह्मास्त्र प्रत्यंगिरा दस महाविद्या धाम यज्ञशाला मेरठ में स्थापित प्राण प्रतिष्ठित दस महाविद्या धाम में आप भी हवन अनुष्ठान यज्ञ कर्म करा सकता है।



