– कानून वापस लेने का ज्ञापन डीएम को सौंपा।
शारदा रिपोर्टर मेरठ। यूजीसी द्वारा लागू किए गए कानून को वापिस लेने की मांग को लेकर शनिवार को कमिश्नरी चौराहे पर दर्जनों छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने भाजपा सरकार को संबोधित ज्ञापन डीएम कार्यालय पर सौंपते हुए बताया कि, यूजीसी द्वारा लागू किया गया कानून जनविरोधी, विभाजनकारी एवं काले कानून को दशार्ता है। जिसे तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।

उन्होंने कहा कि, हम जनपद मेरठ के छात्र, युवा एवं जागरूक नागरिक यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) द्वारा हाल ही में लागू किए गए नए कानून/नियमों के विरुद्ध अपना कड़ा एवं स्पष्ट विरोध दर्ज कराना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि, यूजीसी द्वारा थोपा गया यह कानून शिक्षा सुधार के नाम पर छात्रों के भविष्य के साथ खुला अन्याय है। इस कानून के कारण सामान्य वर्ग के बच्चों में भय, तनाव और असुरक्षा का वातावरण पैदा हो गया है। आज सामान्य वर्ग का छात्र स्वयं को ठगा हुआ, उपेक्षित और मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस कर रहा है। यह कानून उनके आत्मसम्मान, मानसिक स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य पर सीधा प्रहार है। यह स्थिति केवल शैक्षणिक समस्या नहीं, बल्कि सामान्य वर्ग के बच्चों का गंभीर मानसिक उत्पीड़न है, जिसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर नीति-निमार्ताओं और प्रशासन पर जाती है। इस पर रोक नहीं लगी, तो इसके गंभीर सामाजिक परिणाम सामने आ सकते हैं। इसके अतिरिक्त, यह कानून समाज में आपसी मतभेद की जानबूझकर बढ़ाने और भाईचारे में गहरी खाई खोदने का काम कर रहा है। शिक्षा जैसी पवित्र व्यवस्था को जाति और वर्ग के आधार पर बांटकर यह कानून सामाजिक सौहार्द को नष्ट करने की दिशा में ले जा रहा है, देश की एकता और अखंडता के लिए घातक है। जनविरोधी और विभाजनकारी कानून किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। शिक्षा का उद्देश्य समान अवसर देना है, न कि एक वर्ग को भयभीत कर मानसिक रूप से तोड़ना।
जनभावनाओं की अनदेखी न करते हुए इस विषय को तत्काल शासन एवं संबंधित उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाए तथा यूजीसी द्वारा लाए गए इस काले कानून को अविलंब वापस लिया जाए। यदि जनता की आवाज को अनसुना किया गया, तो असंतोष और विरोध की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


