– पुलिस ने 40 लाख का सोना और 5.35 लाख रुपए किए बरामद, चार महीने पहले ही छोड़ी थी नौकरी।
बुलंदशहर। अनूपशहर में फर्जी सीबीआई बनकर की गई लूट का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इस वारदात का मास्टरमाइंड व्यापारी की दुकान का पूर्व मजदूर निकला। पुलिस ने आरोपी मजदूर और उसके तीन साथियों को गिरफ्तार कर लिया है। उनके कब्जे से लूटा गया करीब 40 लाख रुपए का सोना और 5.35 लाख रुपए की नकदी बरामद की गई है। बताया जा रहा है कि आरोपी ने कर्ज से परेशान होकर इस लूट की योजना बनाई थी।

यह घटना 19 दिसंबर की सुबह करीब नौ बजे अनूपशहर के मोहल्ला पोखर निवासी बिल्डिंग मैटेरियल व्यापारी शंकर भगवान के घर हुई थी। चार बदमाश खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर घर में घुसे थे। उन्होंने तमंचे के बल पर घर के सदस्यों को डराकर एक कमरे में बंद कर दिया। करीब आधे घंटे तक घर में छानबीन करने के बाद आरोपी लगभग 40 लाख रुपए के जेवरात और 5.35 लाख रुपए की नकदी लेकर फरार हो गए थे।
पुलिस ने 12 दिन के भीतर इस मामले का खुलासा किया। स्वाट टीम प्रभारी असलम, प्रदीप कुमार, कपिल नैन, प्रदीप कुमार, आरिफ, रोहित कुमार, नरेन्द्र कुमार, सचिन चौहान और अनूपशहर पुलिस की टीम ने करीब 400 सीसीटीवी फुटेज खंगाले। जांच में सामने आया कि गांव रूपवास ऐंचोरा निवासी संजय शर्मा, जो पहले व्यापारी की दुकान पर ट्रैक्टर चलाकर मजदूरी करता था, उसने ही इस पूरी वारदात की साजिश रची थी। संजय ने लगभग चार महीने पहले ही दुकान पर मजदूरी करना छोड़ दिया था।
पुलिस के अनुसार, आरोपी संजय शर्मा पहले भी मारपीट के एक मामले में जेल जा चुका है। जेल में ही उसकी मुलाकात गैंग के सरगना याकेश यादव, यशपाल उर्फ राजा यादव और दीपक यादव से हुई थी। दुकान से मजदूरी छोड़ने के बाद संजय ने इन तीनों से संपर्क किया और उन्हें व्यापारी के घर में करीब एक करोड़ रुपए के जेवरात व नकदी होने की बात बताई थी।
बताया जा रहा है कि आरोपी याकेश यादव, यशपाल उर्फ राजा यादव व दीपक यादव हार्डकोर क्रिमिनल हैं और वह सितंबर 2025 में ही जेल से छूटकर आए थे। आरोपियों ने नोएडा के सेक्टर 24 में डकैती की वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 40 लाख रुपए के जेवरात और 5.35 लाख रुपए की नकदी बरामद की है।
तीन दिन रेकी, फिर बिना मोबाइल की थी वारदात
चारों आरोपियों ने तीन दिन तक व्यापारी के घर की रेकी थी। आरोपी संजय शर्मा को पहले से पता था कि व्यापारी घर से कब निकलता है। इसके बाद भी वारदात को फुल प्रूफ करने के लिए पहले तीन दिन रेकी की गई और फिर बिना मोबाइल साथ लिए वारदात को अंजाम दिया था। आरोपियों को पता था कि मोबाइल का प्रयोग करने से पुलिस उन तक आसानी से पहुंच सकती है। ऐसे में उन्होंने अपने मोबाइल घर ही छोड़े थे।
माल का बंटवारा किया और फिर हो गए फरार
वारदात के बाद आरोपियों ने लूटे गए माल का बंटवारा किया और अपने-अपने घर चले गए थे। इसके बाद जब मामला मीडिया में सुर्खियां बना तो आरोपी अपने दोस्तों व रिश्तेदारों के घर जाकर छिप गए थे।

