- पकवानों को खरीदने के लिए बाजारों में उमड़ रही लोगों की भीड़,
- होली पर बढ़ गई सफेद कपड़ों की डिमांड।
शारदा रिपोर्टर मेरठ। शहर में होली के त्योहार को लेकर बाजारों में जबरदस्त रौनक है, जहां लोग पारंपरिक पकवानों, खासकर गुजिया, पापड़ी, दही भल्ले, गोल गप्पे और रंग-गुलाल की जमकर खरीदारी कर रहे हैं। सदर बाजार, बुढ़ाना गेट, लालकुर्ती बेगम पुल जैसे प्रमुख बाजारों में खरीदारी के लिए भीड़ उमड़ रही है, और मिष्ठान भंडारों पर विशेष होली स्पेशल मिठाइयां उपलब्ध हैं।

होली के लिए गुजिया के अलावा मालपुआ, रबड़ी और विभिन्न प्रकार की अन्य मिठाइयां खूब बिक रही हैं। पकवान और स्नैक्स को बात करें तो पारंपरिक स्नैक्स में चाट, कचौरी और ठंडाई के साथ-साथ भांग का भी इंतज़ाम किया जा रहा है। सांप्रदायिक सौहार्द के इस पर्व को देखते हुए मेरठ के बुढ़ाना गेट क्षेत्र में, मतीन जैसे दुकानदार होली के लिए रंग और गुलाल बेचकर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश कर रहे हैं। बाज़ार में रंग-बिरंगे गुलाल और त्यौहार से जुड़ी अन्य सामग्रियों की दुकानों पर रौनक है, जिससे होली की खुशी दोगुनी हो रही है।
रंग, उमंग एवं उल्लास के पर्व होली को लेकर सोमवार को बाजार गुलजार रहा। बाजार में जगह-जगह रंग-गुलाल, पिचकारी की दुकानें सजी है। बुधवार को पर्व मनाया जाएगा। लोगों ने रंग-गुलाल, पिचकारी के साथ पकवान बनाने के लिए खाद्य सामग्रियों की जमकर खरीदारी की। बाजार में हर्बल एवं परंपरागत दोनों तरह के रंग-अबीर बिक रहे हैं। लेकिन अधिकांश लोगों का झुकाव हर्बल रंग और अबीर की ओर रहा। लोग त्वचा एवं आंख पर केमिकल युक्त रंगों के प्रभाव को देखते हुए हर्बल रंगों को प्राथमिकता दे रहे हैं। हर्बल रंग मंहगा होने के बाद भी इसकी अधिक बिक्री हो रही है। जिसके चलते बाजारों में खासी रौनक देखने को मिल रही है। सोमवार के बाद मंगलवार को भी रंगों की खरीदारी कर रहे गौतम कुमार, आरती एवं अभिषेक कुमार ने बताया कि पहले परंपरागत रंगों का प्रयोग करते थे। यह रंग केमिकल युक्त होने के कारण त्वचा एवं आंख में जलन होता था। लेकिन अब हर्बल रंगों से होली खेलते हैं। हर्बल रंग त्वचा और आंख के लिए सुरक्षित है। इसके प्रयोग से किसी तरह की एलर्जी या त्वचा की समस्या नहीं होती है। चेहरे का रंग भी जल्द साफ हो जाता है।
कारोबारी सनत कुमार ने बताया कि पिछले साल की तरह ही रंग एवं गुलाल की बिक्री हो रही है। परंपरागत एवं हर्बल दोनों तरह के रंग एवं गुलाल उपलब्ध है। लोग अपनी-अपनी पसंद के रंग-गुलाल की खरीदारी कर रहे है। कारोबारियों ने बताया कि रंग एवं गुलाल की बिक्री पिछले साल की तरह ही हो रही है। लाल एवं हरे रंग की अधिक डिमांड है।
बाजार पर चढ़ा होली का चटक रंग
बाजार में स्थायी दुकानों के साथ ही सड़क किनारे फुटपाथ पर अस्थायी दुकानों पर रंग-गुलाल, कई तरह की पिचकारियों, मुखौटों एवं टोपियों की बिक्री हो रही है। होली की खरीदारी को लेकर बच्चों में अधिक उत्साह देखा जा रहा है। मिसाइल, एके-47 पिचकारियों के साथ स्प्रे कलर, सिलेंडर पिचकारियों की अधिक डिमांड है। 20 रुपये से 900 सौ तक की पिचकारियां बाजार में उपलब्ध है। होली पर पुआ के साथ लजीज व्यंजनों के खाने की परंपरा को लेकर लेकर खाद्य सामग्रियों की खरीदारी हुई। किराना दुकान में ग्राहकों की भीड़ रही। मैदा, चीनी के साथ ही ड्राय फ्रूटस की जमकर खरीदारी हुई। पनीर एवं खोवा आदि की भी खूब खरीदारी हुई। होली को लेकर कपड़े की भी खरीदारी हो रही है। ब्रांडेड कंपनियों के शोरूम के साथ ही फुटपाथ पर सजी कपड़ों की दुकानों पर भी खरीदारी को लेकर दिनभर भीड़ लगी रही। पैंट-शर्ट के साथ ही कुर्ता-पायजमा की लोगों ने खरीदारी की। होली को लेकर युवा एवं बच्चों में उमंग दिख रहा है। होली गीतों की धूम मची है।
आज चंद्र ग्रहण, कल मनाया जाएगा रंगोत्सव मुंगेर
होली नजदीक आते ही तैयारी शुरू हो गयी है। शहर पर भी होली का चटक रंग चढ़ गया है। फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर होलिका दहन 2 मार्च की रात्रि में किया जाएगा, जबकि 3 मार्च को चंद्र ग्रहण के काररण रंगों का पर्व होली 4 मार्च को मनाया जाएगा। ज्योतिष राकेश मिश्र ने बताया कि, वाराणसी पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 2 मार्च सोमवार को शाम 5.18 बजे से प्रारंभ होकर 3 मार्च मंगलवार को अपराह्न 4.33 बजे तक रहेगी। पंचांग के अनुसार 2 मार्च को शाम 5.18 बजे से ही पूर्णिमा के साथ भद्रा भी आरंभ हो जाएगी। भद्रा रहने के कारण प्रदोष काल में होलिका दहन संभव नहीं होगा। भद्रा का समापन 3 मार्च प्रात: 4.56 बजे बताया गया है। भद्रा मुख का त्याग करते हुए होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात्रि 11.53 बजे से 12:50 बजे के बीच निर्धारित किया गया है।
परंपरा के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा की रात्रि में प्रदोष काल में ही होलिका दहन किया जाता है, इसलिए श्रद्धालु निर्धारित मुहूर्त में ही होलिका दहन करेंगे। 3 मार्च को खंडग्रास चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। ग्रहण दोपहर 3.20 बजे से प्रारंभ होगा, जबकि इसका सूतक काल प्रात: 6.20 बजे से प्रभावी हो जाएगा। वाराणसी पंचांग के अनुसार मुंगेर में ग्रहण मोक्ष सायं 5:48 बजे होगा। चंद्र ग्रहण के कारण 3 मार्च को रंगोत्सव नहीं मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 3 मार्च को 4:33 बजे समाप्त होने के बाद चैत्र कृष्ण प्रतिपदा 4 मार्च को पड़ेगी। इसी दिन होली मनाई जाएगी।

