– कुंअर बेचैन के काव्य का सौंदर्यशास्त्रीय अध्ययन का विमोचन हुआ।
शारदा रिपोर्टर मेरठ। हिन्दी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय हिन्दी साहित्य और सामाजिक सरोकार का सफल आयोजन रहा।

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रोफेसर नवीन चन्द्र लोहनी कुलपति उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी जो आॅनलाइन रुप से जुड़े ने किया। मंच का संचालन डॉ. यज्ञेश ने किया। इसी सत्र के दौरान विषय पर आधारित स्मारिका का विमोचन किया गया।
प्रोफेसर ऋषभदेव शर्मा समकालीन साहित्य का आरम्भिक समय 1990 का संक्रमण काल माना जा सकता है। आर्थिक उदारीकरण, बाजारीकरण का प्रभाव बदलते मूल्यों का समकालीन साहित्य पर प्रभाव दिखाई देता है। हिन्दी साहित्य के विद्वानों की रचनाओं के उदाहरणों के साथ इस विषय के महत्व और उसकी आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
आदिवासी विमर्श तथा अन्य विमर्शों के प्रभाव व उसकी उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला। प्रोफेसर नरेश मिश्र ने भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान समय साहित्य और साहित्य के भविष्य की संभावनाओं को विविध दृष्टिकोणों अपने अभिभाषण दौरान अभिव्यक्त किया। प्रोफेसर नवीन चन्द्र लोहनी ने, संगोष्ठी के महत्व को उल्लेखित व वर्तमान समय के संबंधों से संदर्शित किया। प्रोफेसर नामदेव ने विमर्शों की वर्तमान स्थिति, उनके इतिहास और वर्तमान समय तक की उनकी यात्रा व विमर्शी में व्याप्त नई संभावनाओं का अपने अभिभाषण में उल्लेखित किया।
इस अवसर पर एक स्मारिका एवं डॉ यज्ञेश कुमार की पुस्तक डॉ कुंअर बेचैन के काव्य का सौंदर्यशास्त्रीय अध्ययन का विमोचन भी हुआ। दूसरे सत्र में वक्ता रूप में डॉ विजय कुमार वेदालंकार, डॉ अनिल कुमार, डॉ सुमित नागर रहे। तीसरे सत्र में एम. पी. शर्मा, विकास सिंह, डॉ असलम उपस्थित रहे।
चतुर्थ सत्र में प्रोफेसर दिनेश चमोला, डॉ आलोक कुमार तिवारी, संगोष्ठी का संचालन डॉ यज्ञेश कुमार ने किया ।
संगोष्ठी में डॉ विद्यासागर सिंह, डॉ प्रवीण कटारिया, डॉ अंजू एवं शोधार्थी राखी सिंह , गरिमा सिंह, विपिन कुमार, सचिन कुमार, विनय कुमार, अपूर्व वर्मा, ऋतु धामा, विशाल यादव , खुशी, मोहित सिंह, कपिल राणा उपस्थित रहे।


