नई दिल्ली। केरल हाई कोर्ट ने हिंदू पत्नियों के मेंटिनेंस को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट के मुताबिक, पत्नी अपने पति के अचल संपत्ति के ट्रांसफर के बाद भी उस पर मेंटेनेंस का दावा कर सकती है. कोर्ट के मुताबिक, ऐसा करने के लिए हिंदू पत्नी संपत्ति के ट्रांसफर से पहले मेंटेनेंस के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू की हो। फिर जो इस संपत्ति का खरीदार को उसको पत्नी के दावे की जानकारी हो। कोर्ट ने ये फैसला सुलोचना बनाम अनीता और अन्य के मामले में सुनाया है।

जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी, जस्टिस पीवी कुन्हीकृष्णन और जस्टिस जी गिरीश की बेंच ने एक डिवीजन बेंच की ओर से भेजे गए मामले पर यह फैसला सुनाया। डिवीजन बेंच ने इस मुद्दे पर विरोधाभासी फैसलों पर ध्यान दिया था कि क्या हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 एक पत्नी को अपने पति की अचल संपत्ति से मेंटेनेंस का दावा करने की अनुमति देता है।
कोर्ट ने कहा कि अगर यह दिखाने के लिए सबूत मौजूद थे कि खरीदार को बिक्री के समय, विक्रेता द्वारा अपनी पत्नी को भरण-पोषण से इनकार कर रहा था। ऐसे इनकार से पत्नी के भरण-पोषण का अधिकार एक्टिव हो गया। अगर खरीदार को इसकी जानकारी थी, तो पत्नी नई संपत्ति से अपना क्लेम लागू कर सकती है।
वहीं अगर ये संपत्ति गिफ्ट के द्वारा दी गई है, यानी मुफ्त में ट्रांसफर की गई है तो पत्नी को खरीदार को नोटिस नहीं देना है बल्कि ऐसी स्थिति में पत्नी का अधिकार सीधे लागू हो जाता है। ऐसी स्थिति में पत्नी के भरण-पोषण के अधिकार को टी.पी. अधिनियम की धारा 39 का संरक्षण और विशेषाधिकार मिलेगा।
इसके अलावा, कोर्ट ने फैसला सुनाया कि अगर पत्नी कानूनी कार्रवाई शुरू करती है या फिर पति की मौत के कारण उसे मेंटेनेंस न मिलने की अवधि के दौरान ऐसा कोई चल संपत्ति का ट्रांसफर किया जाता है, तो खरीदार को ट्रांसफर आॅफ प्रॉपर्टी एक्ट की धारा 39 या हिंदू एडॉप्शंस एंड मेंटेनेंस एक्ट की धारा 28 के मकसद से ऐसे अधिकार की जानकारी होने का माना जाएगा।
फुल बेंच की ओर से दिए गए रेफरेंस की शुरूआत एक मामले से हुई. इसमें खरीदार की तरफ से दायर किए गए मामले का जिक्र किया गया। इस मामले में 2007 में एक ऐसे आदमी से पांच सेंट जमीन खरीदी थी जो अपनी पत्नी से अलग रहता था और वह खुद को उस जमीन का बोनाफाइड खरीदार बता रहा था। एक फैमिली कोर्ट ने उस प्रॉपर्टी को अटैच कर लिया था और बाद में पत्नी के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसने अपने पति के खिलाफ मेंटेनेंस की कार्यवाही शुरू की थी।


