बैंककर्मी युवती-मुस्लिम युवक की शादी पर विवाद, लव जिहाद का आरोप
शारदा रिपोर्टर मेरठ। बैंककर्मी आकांक्षा और शाहवेज राना की शादी के खिलाफ हिंदूवादी संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। दोनों की आज शादी होनी थी। हालांकि, बवाल के डर से दोनों परिवारों ने शादी कैंसिल कर दी है। उधर, हिंदू संगठनों ने इसे लव जिहाद करार देते हुए विरोध में महापंचायत बुलाई है। महापंचायत की घोषणा को देखते हुए पुलिस अलर्ट मोड में आ गई है। गाजियाबाद में हिन्दू रक्षा दल के अध्यक्ष पिंकी चौधरी के महापंचायत में शामिल होने के ऐलान के बाद पुलिस ने उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया है।

संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही ने बताया कि यह पंचायत हिंदू बहन-बेटियों की सुरक्षा और उन्हें ‘लव जिहाद’ में फंसने से रोकने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है।
युवती के चाचा ने ‘लव जिहाद’ का आरोप लगाते हुए धर्मांतरण और संपत्ति हड़पने की साजिश की तहरीर दी है, जिस पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। जबकि युवती का कहना है कि वह साहिल से ही शादी करेगी और चाचा की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेगी।
बैंक कर्मी आकांक्षा ने कहा कि मैं बालिग हूं और अपनी मर्जी से शादी कर रही हूं। मैं सनातनी नहीं, अंबेडकरवादी हूं। बौद्ध धर्म मानती हूं। ये शादी बौद्ध रीति रिवाज से होगी। परिवार शुरू से लड़के को जानता है।
साहिल नाम उनकी मां ने निकनेम के तौर पर दिया था। कुछ संगठन बैंक्वेट हॉल पर बुकिंग रद्द करने का दबाव बना रहा है। उन्हें रास्ते में रोका जा रहा है और बेवजह विवाद खड़ा किया जा रहा है। दरअसल, दलित समाज से ताल्लुक रखने वाली आकांक्षा गौतम एक प्राइवेट बैंक में अकाउंट्स मैनेजर हैं। पिता एलआईसी बीमा के डेवलपमेंट आॅफिसर थे। नौकरी का अधिकतर समय बिजनौर में बिताने के बाद वह मेरठ से रिटायर हुए। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने यहीं की एक पॉश सोसाइटी में घर बनवाया। यह परिवार बौद्ध धर्म को मानता है। 2023 में पिता की हार्ट अटैक से मौत हो गई।
आकांक्षा के मोहल्ले में ही शाहवेज राना का भी घर है। मुस्लिम परिवार के शाहवेज एक प्राइवेट हास्पिटल में मैनेजर हैं। पिता का निधन करीब 10 साल पहले हो चुका है। दोनों परिवारों के बीच काफी लंबे समय से जान-पहचान है। बीते दिनों दोनों परिवारों ने आकांक्षा और शाहवेज के शादी तय की थी।
शादी के लिए आवेदन कर अधिकारियों से स्वीकृति ली: परिवार के लोग बताते हैं कि आकांक्षा और शाहवेज ने शादी के लिए पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनाई। सबसे पहले 1954 के स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत एक सिविल मैरिज के लिए आवेदन किया। दोनों ने अपने-अपने व्यक्तिगत दस्तावेज आधार कार्ड, अविवाहित होने का प्रमाण और पते का प्रमाण 17 नवंबर 2025 को जमा किए।
मेरठ में एडीएम-सिटी के आॅफिस में आवेदन के बाद दोनों ने शादी की डेट फाइनल कर ली। आकांक्षा ने बताया कि जनवरी 2026 तक उन्हें एडीएम आॅफिस से जानकारी मिली कि पुलिस की लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (एलआईयू) ने मंजूरी दे दी है। इसके बाद दोनों परिवारों ने तैयारियां तेज कर दी।
दो शादी कॉर्ड बन गया विवाद: दरअसल, शादी में दो कार्ड छपे जोकि दोस्तों और रिश्तेदारों को भेजी गई। शाहवेज के घरवालों ने उसका शाहवेज राना प्रिंट कराया था जबकि आकांक्षा की तरफ से छपे कार्ड्स पर शाहवेज का नाम साहिल प्रिंट हुआ। साहिल नाम को लेकर विवाद खड़ा हो गया। हिंदूवादी संगठन के लोगों ने धर्मांतरण और लव जिहाद बताते हुए हंगामा खड़ा कर दिया। उधर, चाचा ने भी अपनी भतीजी का ब्रेनवाश करने और लव जिहाद का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करा दी।एफआईआर के अनुसार, शाहवेज ने शादी के कार्ड पर अपना असली नाम छिपाया था और यह लव जिहाद का हिस्सा था।
पूरे परिवार को छह साल से जानते हैं
आकांक्षा की मां लता गौतम ने कहा कि हम लड़के के पूरे परिवार को जानते हैं। लड़के को छह साल से जानती हूं। उसका नाम शावेज हैं। मैंने उसे निकनेम साहिल दिया था। जिसे शादी के कार्ड पर छपवाया गया। सभी रिश्तेदार शादी में शामिल होने के लिए आ रहे हैं।
चाचा की तहरीर पर पुलिस कर रही जांच
युवती के चाचा प्रेमचंद ने पुलिस और डीएम कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी भतीजी को फुसलाकर धर्मांतरण के जाल में फंसाया गया है ताकि संपत्ति पर कब्जा किया जा सके। उनकी तहरीर पर गंगानगर थाना में देर रात धर्मांतरण का केस दर्ज कर लिया गया। पुलिस अब दोनों पक्षों के दावों और शादी के कार्ड्स में अलग-अलग नामों की गहराई से पड़ताल कर रही है।


