– आने वाले दिनों में साबुन, डिटर्जेंट, शैंपू और अन्य रोजमर्रा के उत्पाद हो जाएंगे महंगे।
शारदा रिपोर्टर मेरठ। भारतीय आम उपभोक्ताओं के लिए आने वाले कुछ महीने आर्थिक मोर्चे पर बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव के बाद, अब आम आदमी की रसोई और बाथरूम तक महंगाई की आंच पहुंचने वाली है। रोजमर्रा के इस्तेमाल वाली वस्तुओं एफएमसीजी के दामों में भारी उछाल आने की आशंका है।

प्रतिष्ठित वित्तीय शोध फर्म ‘नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज’ की एक ताजा रिपोर्ट ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एफएमसीजी कंपनियां वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून 2026 से अपने एफएमसीजी उत्पादों के दाम बढ़ाने की पूरी तैयारी कर चुकी है।
एफएमसीजी उत्पादों के दाम में इस संभावित बढ़ोतरी के पीछे कई वैश्विक और आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं। नुवामा की विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी ने इनपुट कॉस्ट (लागत मूल्य) पर जबरदस्त दबाव डाल दिया है। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की लगातार कमजोरी ने आयात को और भी महंगा कर दिया है।
वर्तमान में वैश्विक बाजार में कच्चा तेल 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। कच्चे तेल के महंगे होने से पेट्रोकेमिकल उत्पादों जैसे पॉलीप्रोपाइलीनऔर पॉलीइथिलीन की उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है। आपको बता दें कि, इन्हीं पेट्रोकेमिकल्स का उपयोग साबुन, डिटर्जेंट, शैंपू और अन्य रोजमर्रा के उत्पादों की सख्त प्लास्टिक पैकेजिंग और कैप्स (ढक्कन) बनाने में किया जाता है। वहीं, अर्थशास्त्रियों के अनुसार, किसी भी एफएमसीजी कंपनी के कुल खर्च का लगभग 15% से 20% हिस्सा सिर्फ उसकी पैकेजिंग लागत पर खर्च होता है। जब पैकेजिंग महंगी होगी, तो स्वाभाविक रूप से एफएमसीजी उत्पादों के दाम में उछाल आएगा। इसके अलावा, महंगे ईंधन के कारण ट्रांसपोर्टेशन का खर्च भी बढ़ गया है, जिसे कंपनियां अंतत: ग्राहकों की जेब से ही वसूलेंगी।
बढ़ोतरी कितनी होगी और कब से होगी लागू: अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि, महंगाई का यह नया झटका कितना तेज होगा। नुवामा का अनुमान है कि, यदि कच्चे मालऔर कच्चे तेल की कीमतों में मौजूदा उछाल इसी तरह बना रहता है, तो वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में कीमतों में कम से कम 3% से 4% की वृद्धि निश्चित रूप से देखने को मिलेगी।राहत की बात सिर्फ इतनी है कि, वर्तमान में अधिकांश बड़ी कंपनियों के पास 30 से 45 दिनों का पुराना स्टॉक (इन्वेंट्री) मौजूद है। इसलिए वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च 2026) के दौरान बाजार पर इसका असर बहुत सीमित रहेगा।
लेकिन जैसे ही कंपनियों का यह पुराना और सस्ते दाम वाला स्टॉक खत्म होगा, बाजार में नई और बढ़ी हुई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी जाएंगी। जिसके चलते आम आदमी को एकबार फिर महंगाई की मार झेलनी पड़ेगी।

