Homeउत्तर प्रदेशMeerutजटिल बीमारियों के लिए आइए मेरठ मेडिकल कॉलेज, मिलेगा आपको उचित इलाज

जटिल बीमारियों के लिए आइए मेरठ मेडिकल कॉलेज, मिलेगा आपको उचित इलाज

-

– हीमोफीलिया और थैलेसीमियां जैसी अनुवांशिक बीमारी का मिलेगा आपको उचित इलाज।

शारदा रिपोर्टर मेरठ। हीमोफीलिया और थैलेसीमिया दोनों ही आनुवंशिक और गंभीर रक्त विकार हैं, जो उम्र के साथ अधिक जटिल हो जाते हैं। हीमोफीलिया में रक्त का थक्का नहीं जमता, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव होता है, जबकि थैलेसीमिया में शरीर पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता, जिससे एनीमिया होता है। 70 से अधिक उम्र के मरीजों में इन बीमारियों का प्रबंधन, जोड़ों की समस्या, हृदय रोग और कैंसर जैसी अतिरिक्त स्वास्थ्य जटिलताओं के कारण चुनौतीपूर्ण हो जाता है। जबकि, अभी तक इसका इलाज मिलना बेहद मुश्किल होता था।

 

 

लेकिन, अब इस बीमारी के लिए एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने संस्थान में 24 घंटे संचालित होने वाला समर्पित हीमोफीलिया एवं थैलेसीमिया स्पेशल सेंटर स्थापित करने के आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं।

आई ड्रीम टू ट्रस्ट के संस्थापक राजन चौधरी और जिला अध्यक्ष अभिषेक भारद्वाज के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मेडिकल कॉलेज प्राचार्य से विस्तृत वार्ता कर मरीजों की समस्याओं को तथ्यात्मक रूप से रखा। जिसके बाद ये फैसला जारी किया गया। संस्था के अनुसार, पिछले सात वर्षों से लगातार ज्ञापन, बैठकें और स्वास्थ्य विभाग से समन्वय के माध्यम से इस मांग को उठाया जा रहा था।

मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ आरसी गुप्ता ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत ब्लड बैंक के पास स्थित विशेष वार्ड और काउंसलिंग कक्ष को स्पेशल सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। केंद्र चौबीसों घंटे और सप्ताह के सातों दिन कार्य करेगा। किसी भी आपात स्थिति में मरीजों को तुरंत चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी। इस बाबत प्रमुख अधीक्षक को सेंटर के लिए आवश्यक स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती और व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

बाल रोग विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नवरतन गुप्ता को सेंटर का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जबकि डॉ। पंकज जेंया को सह-नोडल अधिकारी बनाया गया है।दोनों चिकित्सक मरीजों की नियमित निगरानी, उपचार व्यवस्था और आपातकालीन प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगे।

जरूरी है सेंटर

हीमोफीलिया एक गंभीर आनुवंशिक रक्तस्राव संबंधी बीमारी है, जिसमें शरीर में खून जमने की क्षमता कम हो जाती है। मामूली चोट भी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। वहीं थैलेसीमिया मरीजों को नियमित रक्त चढ़ाने और निगरानी की आवश्यकता होती है। अब तक मरीजों को फैक्टर इंजेक्शन की अनियमित उपलब्धता, अलग वार्ड के अभाव और आपातकाल में त्वरित उपचार न मिलने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। कई बार मरीजों को इधर-उधर भटकना पड़ता था, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती थी।

ये बदलेगा अब

फैक्टर इंजेक्शन की उपलब्धता को नियमित करने की व्यवस्था
आपातकालीन स्थिति में 24 घंटे उपचार
मरीजों का व्यवस्थित पंजीकरण और फॉलोअप
काउंसलिंग के माध्यम से परिवारों को मार्गदर्शन

मेडिकल कॉलेज में हीमोफिलिया के मरीजों के बेहतर इलाज और सुविधाओं को देखते हुए ये फैसला जारी किया गया है। – डॉ. आरसी गुप्ता, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज

Related articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

4,000,000FansLike
100,000SubscribersSubscribe

Latest posts