– संयुक्त प्रेस क्लब के प्रतिनिधि मंडल को डीआईजी ने दिया आश्वासन।
शारदा रिपोर्टर मेरठ। सदर निवासी वरिष्ठ एवं मान्यता प्राप्त पत्रकार अविनाश कुमार सक्सेना को कथित रूप से साजिशन झूठे मुकदमे में फंसाए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। संयुक्त प्रेस क्लब रजिस्टर्ड, मेरठ ने गुरुवार को खुलकर मोर्चा खोलते हुए पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) मेरठ रेंज को ज्ञापन सौंपा और पुलिस की कार्यशैली पर तीखा सवाल खड़ा किया। डीआईजी कलानिधि नैथानी ने किसी अन्य सर्किल से पूरे प्रकरण की जांच का आश्वासन दिया।

अध्यक्ष अतुल महेश्वरी एवं महामंत्री धर्मेंद्र प्रताप सिंह तोमर एवं पत्रकारों ने साफ शब्दों में कहा कि 45 वर्षों से निष्पक्ष पत्रकारिता कर रहे 68 वर्षीय अविनाश कुमार सक्सेना को एक सोची-समझी साजिश के तहत फंसाया गया है। आरोप है कि 9 मार्च 2026 को बेगम बाग क्षेत्र में मेडिकल स्टोर संचालक और उसके पुत्र ने सक्सेना के साथ बेगम बाग चकबंदी कार्यलय वाली रोड मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी थी। जिसके बाद सक्सेना ने 11 मार्च 2026 को थाना लालकुर्ती में लिखित शिकायत और डाक विभाग की स्पीड पोस्ट से भी प्रार्थना पत्र भेजकर शिकायत दी।
लेकिन थाना लालकुर्ती पुलिस प्रभारी ने पीड़ित पत्रकार की सबसे पहले दिए गए प्रार्थना पत्र शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय विपक्षी पक्ष को फायदा पहुंचाते हुए 18 मार्च को ही सक्सेना के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी। जबकि सक्सेना पहले से शिकायतकर्ता थे। पत्रकारों ने इसे थाना पुलिस की पक्षपातपूर्ण और संदिग्ध कार्यशैली बताते हुए कहा कि यह साफ तौर पर निर्दोष व्यक्ति को फंसाने का मामला है।
संयुक्त प्रेस क्लब ने दो टूक कहा कि एक ईमानदार और वरिष्ठ पत्रकार अविनाश कुमार सेक्ससेना को इस तरह प्रताड़ित करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह न केवल एक व्यक्ति के साथ अन्याय है, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता पर भी सीधा सीधा हमला है।
पत्रकारों ने पूरे मामले की किसी दूसरी एजेंसी या थाने से जांच कराने और झूठी एफआईआर को तत्काल निरस्त कराने की मांग की। ज्ञापन देने वालों में अध्यक्ष अतुल महेश्वरी, महामंत्री धर्मेंद्र प्रताप सिंह तोमर, मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार अविनाश कुमार सक्सेना, वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र चौहान, रोहित गौतम, सचिन भारती, सुरेश चंद्र जायसवाल, सरदार जसबीर सिंह समेत कई पत्रकार मौजूद रहे।

