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Thursday, February 26, 2026
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यूजीसी एक्ट-2026 को लागू करने की मांग, निकाला जुलूस, मेरठ कमिश्नरी चौराहे पर किया प्रदर्शन

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– अपनी जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कमिश्नरी चौराहे पर किया प्रदर्शन।

शारदा रिपोर्टर मेरठ। यूजीसी एक्ट-2026 को लागू करने की मांग को लेकर अपनी जनता पार्टी के कार्यकतार्ओं ने कमिश्नरी चौराहे पर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने एक ज्ञापन डीएम कार्यालय पर सौंपते हुए बताया कि, भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण एवं संविधान सम्मत एससी/एसटी, ओबीसी और ईडब्लूएस छात्रों के साथ हो रहे जातीय अपमान और भेदभाव रोकने की दिशा में यूजीसी एक्ट 2026 धर्म, जाति, नस्ल, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण सुधारात्मक कदम है। यह विधेयक भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16, 17, 18, 21 एवं 21-क के अन्तर्गत, समानता, गरिमा और शिक्षा के अधिकार और समता की भावना को सुदृढ़ करता है।

 

 

उन्होंने कहा कि, यूजीसी एक्ट 2026 से विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक मानकों का एकीकरण, प्रशासनिक उत्तरदायित्व तथा विद्यार्थियों के हितों की रक्षा-सुरक्षा सुनिश्चित होगा। जिससे पीएचडी छात्र रोहित वेमूला और डा पायल तडवी और आईआईटी छात्र दर्शन सोलंकी, जैसी घटनाओं का कोई शिक्षार्थी शिकार न बने।

बताया कि, भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों में भेद-भाव के महत्वपूर्ण दृष्टांत इस तरीके से है। जैसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में कम से कम 27-30 छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं दर्ज की की गई हैं, जिनमें आईआईटी कानपुर से सबसे अधिक (हाल के वर्षों में 9) मामले सामने आए हैं। हाल की घटनाओं में 4 फरबरी 2026 तक, आईआईटी बॉम्बे में आत्महत्या का एक नया मामला सामने आया। जबकि, इससे पहले 20 जनवरी, 2026 को आईआईटी कानपुर में एक ऐसा ही मामला सामने आया चुका था।

उन्होंने कहा कि, राज्यसभा में प्रस्तुत सरकारी आंकड़े के अनुसार 2018 से 2023 तक उच्च शिक्षण संस्थानों में 98 आत्महत्याएं उजागर हुई हैं। जिनमें से 39 आईआईटी से, 25 एनआईटी और 25 केन्द्रीय विश्वविद्यालयों से हैं। बताया कि, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के 2023 के आंकड़ों के अनुसार 2023 में छात्रों द्वारा आत्महत्याओं की संख्या 13892 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गयी।

कम रिर्पोटिंग आईसी-3 (इन्टरनेट क्राइम कम्पलेन्ट सेन्टर), संस्थानों की 2025 की एक रिर्पोट में अनुमान लगाया गया है कि, प्रत्येक वर्ष 13000 से अधिक छात्र आत्महत्या के शिकार होते हैं। जिससे पता चलता है कि, कलम और रिर्पोटिंग की कमी या गलत वर्गीकरण के कारण संख्या कम बतायी जा रही है। जबकि, प्रमुख संस्थानों में आत्महत्याओं एक बड़ा प्रतिशत अनुसूचित जाति/जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों का होता है।

इन आंकड़ों से स्पष्ट हुआ कि, जातिगत भेदभाव के कारणों से प्रभावित होकर उच्च शिक्षण संस्थानों में घटनाएं बड़े पैमाने पर हो रहीं है। जिसे रोकना बेहद जरूरी है। इसलिए अपनी जनता पार्टी, देश व छात्रहित को ध्यान में रखते हुए यूजीसी विधेयक 2026 का समर्थन करती हैं और इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राष्ट्रपति से मांग करती है कि, उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव और हिंसा समाप्त करने के लिए यूजीसी विधेयक 2026 को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

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