- दो अप्रैल को हुए मुकदमों को वापस लेने की मांग।
- बहुजन सशक्तिकरण संघ ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए किया कलक्ट्रेट में प्रदर्शन।
शारदा रिपोर्टर मेरठ। दो अप्रैल 2018 के आंदोलन में दर्ज मुकदमो को तत्काल प्रभाव से वापिस लेने की मांग को लेकर बुधवार को बहुजन सशक्तिकरण संघ के दर्जनों सदस्यों ने कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने एक ज्ञापन डीएम कार्यालय पर सौंपते हुए बताया कि, सन 2018 को दो अप्रैल वाले दिन हुए जनआंदोलन के दौरान प्रदेश भर में हजारों निर्दोष युवाओं, सामाजिक कार्यकतार्ओं एवं आम नागरिकों पर मुकदमे दर्ज किए गए।

उन्होंने कहा कि, यह आंदोलन सामाजिक न्याय, संवैधानिक अधिकारों एवं सम्मान की रक्षा के लिए हुआ था। जबकि, ना कि किसी आपराधिक गतिविधि के लिए। वर्षों बीत जाने के बावजूद आज भी इन मुकदमों की तलवार निर्दोष लोगों के सिर पर लटकी हुई है। इससे उनके रोजगार, शिक्षा, सामाजिक प्रतिष्ठा एवं पारिवारिक जीवन पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
प्रदर्शन कर रहे सदस्यों ने बताया कि, लोकतांत्रिक देश में अपनी आवाज उठाना अपराध नहीं हो सकता। जबकि, यह भी स्पष्ट करना आवश्यक है कि, यदि शासन द्वारा अब भी इन मुकदमों को समाप्त नहीं किया जाता है तो इसे सामाजिक न्याय के प्रति सरकार की उदासीनता माना जाएगा। इसलिए बहुजन सशक्तिकरण संघ शासन से स्पष्ट और ठोस कार्यवाही की मांग करता है।
साथ ही दो अप्रैल 2018 आंदोलन से जुड़े सभी मुकदमों की उच्च स्तरीय समयबद्ध समीक्षा कराई जाए। जिन मुकदमों में कोई ठोस आपराधिक साक्ष्य नहीं हैं. उन्हें तत्काल प्रभाव से वापिस लिया जाए। जबकि, निर्दोष युवाओं और सामाजिक कार्यकतार्ओं को सम्मानपूर्वक राहत दी जाए।
उन्होंने कहा कि, यदि इस विषय पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो बहुजन सशक्तिकरण संघ प्रदेश स्तर पर व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन चलाने के लिए बाध्य होगा। जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।
उन्होंने कहा कि, अब समय आ गया है कि सरकार न्याय, संविधान और सामाजिक समरसता के पक्ष में उपरोक्त प्रार्थना पत्र को गंभीरता से लिया जाकर स्पष्ट निर्णय लें।


