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Saturday, January 31, 2026
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Amethi Crime: पेड़ से लटका मिला युवक का शव, हत्या की आशंका, पुलिस जांच में जुटी

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 – युवक के मोबाइल को पुलिस ने कब्जे में ले लिया है और जांच शुरू कर दी हैं।


अमेठी। जिले के जगदीशपुर कोतवाली क्षेत्र के हारीमऊ गांव के बाहर एक युवक का शव पेड़ से लटका मिला है। परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया है। युवक के मोबाइल को पुलिस ने कब्जे में ले लिया है। इससे कई राज खुल सकते हैं।

जगदीशपुर कोतवाली क्षेत्र के हारीमऊ गांव में बुधवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। गांव के बाहर एक पेड़ से 20 वर्षीय युवक लक्ष्मण पुत्र श्रीराम का शव लटका मिला। ग्रामीणों की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटना के बाद गांव में शोक और सन्नाटे का माहौल है।

परिजनों का आरोप है कि लक्ष्मण की हत्या कर शव को पेड़ से लटकाया गया है। उनका कहना है कि यह आत्महत्या नहीं हो सकती क्योंकि लक्ष्मण मानसिक रूप से मजबूत और परिवार का सहारा था। पुलिस ने फिलहाल मामला संदिग्ध मानते हुए जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मोबाइल से खुल सकते हैं कई राज

मृतक के एक रिश्तेदार का दावा है कि लक्ष्मण गांव की एक लड़की से बातचीत करता था और उसका शव भी उसी के घर के पास पेड़ पर लटका मिला है। परिजन इस पहलू को भी हत्या से जोड़ कर देख रहे हैं। पुलिस ने युवक का मोबाइल कब्जे में ले लिया है, और कॉल डिटेल्स व चैट्स की जांच की जा रही है। माना जा रहा है कि मोबाइल से इस मामले से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं।

शोक में डूबा परिवार: लक्ष्मण की मौत से टूटा आशियाना, मां सीता की चीखों ने तोड़ा सबका दिल

गांव की तंग गलियों में आज मातम पसरा है। हर आंख नम है, हर चेहरा दुख में डूबा हुआ। सात भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर रहा लक्ष्मण अपने परिवार की रीढ़ था। वह ही था जो दिन-रात मेहनत करके घर चलाता था, भाई-बहनों की पढ़ाई और जरूरतें पूरी करता था। लक्ष्मण की मौत ने उसकी मां सीता को तोड़ कर रख दिया है। वह बेसुध होकर चीख-चीखकर एक ही बात कह रही हैं की मेरा लक्ष्मण घर चलाने वाला था, अब कौन देखेगा इस टूटे घर को” गांव में मौजूद हर शख्स की आंखें उस मां की पीड़ा देखकर भर आईं। पिता श्रीराम मजदूरी करते हैं, लेकिन घर की असल जिम्मेदारी लक्ष्मण पर ही थी। बड़ी बहन शांति की शादी हो चुकी है, लेकिन छोटे भाई भरत, शत्रुघ्न और बहनें पारो व लाडो अब खामोश हैं। वे नहीं समझ पा रहे कि अचानक उनका सहारा छिन क्यों गया।

 

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