220वें दुर्गा पूजा महोत्सव में भक्ति, बंगाली परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम
मेरठ| 19 अक्टूबर 2026। बंगाली दुर्गाबाड़ी समिति, मेरठ में आयोजित 220वें दुर्गा पूजा महोत्सव के अंतर्गत सोमवार को महा अष्टमी का पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर में मां दुर्गा के दर्शन एवं पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया। पूरे परिसर में मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और मां के जयकारों के बीच भक्तों ने मां दुर्गा के चरणों में शीश नवाकर परिवार, समाज और देश की सुख-समृद्धि, शांति एवं कल्याण की कामना की।
प्रातःकालीन पूजा एवं पुष्पांजलि
महा अष्टमी के पावन अवसर पर प्रातःकाल मां दुर्गा की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। पारंपरिक बंगाली रीति-रिवाजों के अनुसार आयोजित पूजा में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर मां को पुष्पांजलि अर्पित की। महा अष्टमी बंगाली दुर्गा पूजा का अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है, जब भक्त मां दुर्गा के शक्ति, साहस और अधर्म पर धर्म की विजय के स्वरूप की आराधना करते हैं।
पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने पूरे भक्तिभाव से मां का स्मरण किया। मंदिर परिसर में व्याप्त आध्यात्मिक वातावरण ने श्रद्धालुओं को बंगाली दुर्गा पूजा की सदियों पुरानी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य किया।
संधि पूजा: बंगाली दुर्गा पूजा की आध्यात्मिक आत्मा
महा अष्टमी के अवसर पर आयोजित संधि पूजा बंगाली दुर्गा पूजा का सबसे पवित्र, भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक है। बंगाली समाज के लिए संधि पूजा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि मां दुर्गा के प्रति अटूट विश्वास, शक्ति, साहस और दिव्य अनुभूति का प्रतीक है। इस विशेष क्षण का श्रद्धालुओं को पूरे वर्ष इंतजार रहता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संधि पूजा अष्टमी की अंतिम 24 मिनट और नवमी की प्रारंभिक 24 मिनट की संधिकालीन अवधि में संपन्न होती है। कुल 48 मिनट की यह पावन अवधि महा अष्टमी और महानवमी के मिलन का प्रतीक है। मान्यता है कि इसी संधिकाल में मां दुर्गा ने चंड और मुंड नामक असुरों के संहार के लिए चामुंडा का स्वरूप धारण किया था। इसी कारण इस पूजा में मां की शक्ति और अधर्म पर धर्म की विजय का विशेष स्मरण किया जाता है।
इस अवसर पर चंडी पाठ, विशेष मंत्रोच्चार और 108 दीपों के प्रज्ज्वलन की परंपरा के माध्यम से मां की आराधना की जाती है। दीपों की ज्योति, शंखध्वनि, धाक की गूंज और मंत्रों का सामूहिक उच्चारण वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है।
बंगाली परिवारों और समुदायों के लिए संधि पूजा भावनाओं से गहराई से जुड़ा क्षण है। इस दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा के दिव्य स्वरूप का स्मरण करते हुए अपने जीवन में शक्ति, सुरक्षा, शांति और सकारात्मक ऊर्जा की कामना करते हैं। देश-विदेश में रहने वाले बंगाली परिवारों के लिए भी संधि पूजा अपनी सांस्कृतिक जड़ों, पारिवारिक परंपराओं और बंगाली पहचान से जुड़ने का विशेष अवसर है।
बंगाली दुर्गाबाड़ी समिति, मेरठ में संधि पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने पूरे भक्तिभाव के साथ मां की आराधना की। यह पावन अनुष्ठान 220 वर्षों से चली आ रही धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की निरंतरता का प्रतीक बना।
समिति पदाधिकारियों का संदेश
समिति अध्यक्ष श्री अमिताभ मुखर्जी ने महा अष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा, “महा अष्टमी और संधि पूजा मां दुर्गा की शक्ति, साहस और धर्म की विजय का प्रतीक हैं। 220 वर्षों से चली आ रही हमारी परंपरा केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। मां दुर्गा सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करें।”
महासचिव श्री अभय मुखर्जी ने कहा, “बंगाली दुर्गाबाड़ी समिति, मेरठ के लिए 220वां दुर्गा पूजा महोत्सव अत्यंत गौरव और भावनात्मक जुड़ाव का अवसर है। विशेष रूप से संधि पूजा बंगाली समाज की आध्यात्मिक चेतना और मां दुर्गा के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है। हमारा प्रयास है कि पारंपरिक पूजा-विधियों और सामूहिक सहभागिता के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों तक हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पहुंचती रहे। सभी श्रद्धालुओं एवं सहयोगकर्ताओं का योगदान इस महोत्सव की वास्तविक शक्ति है।”
पूजा सचिव श्री सुब्रोतो विश्वास ने कहा, “महा अष्टमी की पूजा और संधि पूजा बंगाली दुर्गा पूजा की आध्यात्मिक आत्मा हैं। संधि पूजा के 48 मिनट प्रत्येक बंगाली के लिए अत्यंत भावुक और श्रद्धापूर्ण क्षण होते हैं। इस दौरान मां के दिव्य स्वरूप का स्मरण करते हुए भक्त शक्ति, साहस और कल्याण की कामना करते हैं। मां दुर्गा की कृपा सभी भक्तों पर बनी रहे और समाज में प्रेम, सद्भाव एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो।”
कार्यकारिणी सदस्यों का सहयोग
महा अष्टमी के आयोजन को सफल बनाने में समिति के पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी सदस्यों की सक्रिय सहभागिता रही। श्री अजय मुखर्जी, डॉ. सुब्रोतो सेन, श्रीमती संतोश्री विश्वास, कुमारी जूही दत्ता, श्री अभिनव दत्ता, श्री प्रदीप मुखर्जी, श्री नोबेंदु राय चौधरी, श्री विश्वजीत विश्वास तथा श्री संजय बैनर्जी सहित अन्य सदस्यों ने धार्मिक आयोजन एवं व्यवस्थाओं में सहयोग प्रदान किया।
समिति के सभी सदस्यों और स्वयंसेवकों ने श्रद्धालुओं की सहभागिता तथा पूजा संबंधी व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में योगदान दिया।
220 वर्षों की परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक विरासत
बंगाली दुर्गाबाड़ी समिति, मेरठ का 220वां दुर्गा पूजा महोत्सव शहर की ऐतिहासिक धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्षों से यह आयोजन बंगाली परंपराओं, सामाजिक एकता और मां दुर्गा के प्रति अटूट श्रद्धा को सहेजने का माध्यम रहा है।
महा अष्टमी की पूजा और संधि पूजा ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि दुर्गा पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पीढ़ियों को जोड़ने वाली सांस्कृतिक धरोहर और सामूहिक आस्था का उत्सव है।
समिति ने सभी श्रद्धालुओं एवं नगरवासियों से महोत्सव में सहभागी बनकर मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की।