प्रेमी के साथ मिलकर मुस्कान ने पति को मारकर डाला नीले ड्रम में
शारदा रिपोर्टर मेरठ। चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में पिछले 17 महीनों में काफी कुछ बदल गया। मर्चेंट नेवी अफसर सौरभ के लंदन से वापस भारत आने के बाद उसकी हत्या पत्नी मुस्कान ने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर की। उसकी लाश को नीले ड्रम में टुकड़ों में डालकर सीमेंट से सील कर दिया।
जब इस नृशंस हत्याकांड का राज खुला, उसके बाद सौरभ की पत्नी मुस्कान, प्रेमी साहिल को पुलिस ने जेल भेज दिया। कोर्ट ने मुस्कान साहिल को हत्या का दोषी माना।
24 फरवरी 2025: पत्नी और बेटी का जन्मदिन मनाने भारत लौटे
सौरभ राजपूत लंदन में रहते थे। नेवी में मर्चेंट नेवी अफसर थे। पत्नी मुस्कान रस्तोगी और बेटी पीहू का जन्मदिन मनाने के लिए वह 24 फरवरी को मेरठ लौटे। परिवार के साथ समय बिताने के लिए उनका भारत आना, बाद में इस हत्याकांड की कहानी का अहम हिस्सा बना।
28 फरवरी 2025: बेटी के जन्मदिन पर साथ डांस करने का वीडियो आया सामने
बेटी पीहू के जन्मदिन पर सौरभ और मुस्कान ने साथ में डांस किया। इसका वीडियो सामने आया। इस वीडियो के कारण जन्मदिन की खुशियों और कुछ ही दिन बाद हुई हत्या के बीच का अंतर चर्चा में रहा।
3 मार्च 2025: हत्या के बाद नीले ड्रम में रखा शव
पुलिस जांच के मुताबिक, 3 मार्च की रात मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर सौरभ की हत्या की। इसके बाद शव के टुकड़े किए। उन्हें सीमेंट से नीले ड्रम में पैक कर दिया। जिसके कि बदबू न आए और किसी को हत्या का पता न चल सके।
4 मार्च 2025: हत्या के अगले दिन घूमने निकले मुस्कान और साहिल
सौरभ की हत्या के अगले दिन मुस्कान और साहिल घूमने निकल गए। दोनों मनाली, नैनीताल और शिमला गए।
17 मार्च 2025: माता-पिता के सामने मुस्कान ने जुर्म कबूला
सौरभ के अचानक गायब होने पर शक गहराने लगा। इसी दौरान मुस्कान ने अपने माता-पिता के सामने हत्या की बात स्वीकार की।
18 मार्च 2025: किराए के मकान से नीले ड्रम में मिला शव
पुलिस ने मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र स्थित किराए के मकान में जांच की। यहां नीले ड्रम के अंदर सौरभ का शव बरामद हुआ। पुलिस ने मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर लिया।
19 मार्च 2025: दोनों आरोपियों की कोर्ट में पेशी
सौरभ के शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया। पुलिस ने मुस्कान और साहिल को अदालत में पेश किया। इसके बाद दोनों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेजा गया।
7 अप्रैल 2025: मुस्कान के गर्भवती होने की जानकारी
जेल में बंद मुस्कान के गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। इस घटनाक्रम ने मामले को एक नया पारिवारिक पहलू दिया। हालांकि, हत्या के मामले में पुलिस की जांच और अदालत की कार्यवाही अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाओं के तहत आगे बढ़ती रहीं।
मई-जून 2025: करीब 1,000 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल
पुलिस ने जांच के बाद अदालत में करीब 1,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। इसमें आरोपियों के खिलाफ जुटाए गए साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों को शामिल किया गया। इसके बाद अदालत में आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। मुस्कान और साहिल पर हत्या तथा सबूत मिटाने के आरोप तय किए गए।
जुलाई 2025: जिला जज की अदालत में नियमित सुनवाई शुरू
मामला मेरठ जिला जज की अदालत में नियमित सुनवाई के लिए पहुंचा। इसके बाद गवाहों के बयान दर्ज करने और साक्ष्यों को अदालत के सामने रखने की प्रक्रिया शुरू हुई। पुलिसकर्मियों, फोरेंसिक टीम से जुड़े लोगों, मकान मालिक और डॉक्टरों सहित कई गवाहों की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
24 नवंबर 2025: जेल में मुस्कान ने बेटी को जन्म दिया
जेल में बंद मुस्कान ने मेरठ के मेडिकल अस्पताल में बेटी को जन्म दिया। बच्ची का नाम राधा रखा गया। यह तारीख इसलिए भी चर्चा में रही, क्योंकि इसी दिन सौरभ राजपूत का जन्मदिन था।
जुलाई 2025 से सितंबर 2026: गवाहों के बयान और लंबी सुनवाई
जिला जज की अदालत में मुकदमे की नियमित सुनवाई के दौरान कुल 126 तारीखें पड़ीं। पुलिस, फोरेंसिक टीम, मकान मालिक और डॉक्टरों समेत 22 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
17 सितंबर 2026: दोनों पक्षों की अंतिम बहस पूरी
अदालत में अभियोजन और बचाव पक्ष की अंतिम बहस पूरी हुई। इस चरण में दोनों पक्षों ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर अपनी दलीलें रखीं। अंतिम बहस पूरी होने के बाद फैसले की तारीख को लेकर इंतजार बढ़ गया।
19 सितंबर 2026: अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा
मेरठ के जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। इसका मतलब था कि अदालत ने दलीलें सुन ली थीं और अब मामले में निर्णय सुनाया जाना बाकी था।
30 सितंबर 2026: मुस्कान और साहिल हत्या और सबूत मिटाने के दोषी करार
अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत की हत्या और सबूत मिटाने का दोषी करार दिया। इस फैसले के साथ करीब डेढ़ साल से अधिक समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंची।