HomeTrendingवाराणसी जंक्शन पर पकड़े गए लाखों के दुर्लभ कछुए

वाराणसी जंक्शन पर पकड़े गए लाखों के दुर्लभ कछुए

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कुंभ एक्सप्रेस के जनरल डिब्बे से तस्कर ले जा रहा था कोलकाता, जीआरपी ने एक किया गिरफ्तार


वाराणसी। जीआरपी ने सोमवार की रात कुंभ एक्सप्रेस ट्रेन की जनरल बोगी से एक तस्कर से 24 दुर्लभ कछुए बरामद किए हैं। बरामद कछुओं में 6 कछुए बड़े और बाकी छोटे हैं। जिन्हे चार झोलों और बैग में भरकर ले जाया जा रहा था।

जीआरपी ने अमेठी जिले के जगदीशपुर के गांधीनगर निवासी मोनू कंजड़ को गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया तस्कर शातिर किस्म का है। जीआरपी थाना प्रभारी रजोल नागर ने बताया- उन्हें मुखबिर के जरिए पुख्ता सूचना मिली थी कि हावड़ा की ओर जाने वाली कुम्भ एक्सप्रेस में कछुओं की एक बड़ी खेप ले जाई जा रही है। सूचना मिलते ही तत्काल एक्शन लेते हुए जीआरपी, आरपीएफ और सीआईबी की टीमों को सक्रिय किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग की टीम को भी तुरंत मौके पर बुलाया गया। जिसका नेतृत्व वन दरोगा एके श्रीवास्तव कर रहे थे।

जैसे ही ट्रेन वाराणसी स्टेशन पर आकर रुकी। संयुक्त टीम ने आगे की तरफ लगे जनरल डिब्बे में चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान पुलिस को चार संदिग्ध लावारिस जैसे दिखने वाले बैग मिले। जब इन बैगों को खोलकर देखा गया। बैगों के भीतर बेरहमी से ठंसकर कछुए रखे गए थे।

थाना प्रभारी रजोल नागर ने बताया कि चेकिंग के दौरान पुलिस ने बैगों से कुल 24 कछुए बरामद किए। जिनमें 6 बड़े आकार के और 18 छोटे आकार के कछुए शामिल हैं। पुलिस ने इन बैगों के पास मौजूद एक संदिग्ध युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ की।

जिसके बाद उसकी पहचान मोनू कंजड़ के रूप में हुई। आरोपी मोनू मूल रूप से अमेठी जनपद के जगदीशपुर का रहने वाला है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

थाना प्रभारी रजोल नागर ने बताया कि शुरूआती पूछताछ में आरोपी मोनू कंजड़ ने कबूल किया है कि वह कछुओं की यह खेप अमेठी से लेकर आ रहा था और इसे पश्चिम बंगाल ले जाने की फिराक में था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन कछुओं की कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है।

पूछताछ में तस्कर ने कछुओं की तस्करी के पीछे की मुख्य वजहों का भी खुलासा किया। पुलिस के अनुसार, पश्चिम बंगाल और अन्य सीमावर्ती इलाकों में कछुओं के मांस की भारी मांग रहती है। इसके अलावा, कछुओं के अंगों और मांस का उपयोग कई प्रकार की पारंपरिक दवाएं बनाने में किया जाता है।

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