– कर्नाटक के विशेषज्ञ ने संभाली कमान, ग्रामीणों को दी ट्रेनिंग।
पीलीभीत। टाइगर रिजर्व और आसपास के सामाजिक वानिकी क्षेत्रों में जंगली हाथियों की मौजूदगी ने ग्रामीणों में दहशत फैला दी है। पिछले तीन महीनों से माला और महौफ रेंज के जंगलों में विचरण कर रहे दो जंगली हाथी अब रिहाइशी इलाकों और कृषि क्षेत्रों में देखे जा रहे हैं।

ताजा जानकारी के अनुसार, इन हाथियों को पिछले तीन दिनों से ग्राम महुआ और सिरसा सरदहा के निजी कृषि खेतों में देखा गया है। इससे क्षेत्र के लोगों में चिंता बढ़ गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, वन विभाग ने शुक्रवार देर रात कर्नाटक से आए हाथी मॉनिटरिंग विशेषज्ञ डॉ. रुद्रादित्य को मौके पर बुलाया। डॉ. रुद्रादित्य ने पीलीभीत रेंज के वन कर्मियों के साथ प्रभावित गांवों का दौरा किया।
इस दौरान, विशेषज्ञ ने ग्रामीणों और वन स्टाफ को हाथियों को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर खदेड़ने के वैज्ञानिक उपाय समझाए। उन्होंने हाथियों के व्यवहार को समझने और उनके मार्ग में बाधा उत्पन्न किए बिना उन्हें दिशा देने के तरीकों पर जोर दिया।
डॉ. रुद्रादित्य के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने कृषि भूमि पर मौजूद हाथियों को बिना किसी नुकसान के वापस भेजने की विभिन्न तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया। सामाजिक वानिकी की पीलीभीत रेंज के मरौरी सेक्शन के अंतर्गत आने वाले इन गांवों में अब निरंतर निगरानी रखी जा रही है।
सामाजिक वानिकी के प्रभागीय वनाधिकारी भरत कुमार ने पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले 90 दिनों से दो जंगली हाथी माला और महौफ रेंज के आसपास सक्रिय हैं।
डीएफओ ने पुष्टि की कि हाल ही में इन हाथियों के महुआ और सिरसा सरदहा के खेतों में घुसने की खबर मिली थी। उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता जन-हानि और फसल के नुकसान को रोकना है। कर्नाटक के विशेषज्ञ की मदद से हम ‘एलिफेंट प्रूफिंग’ और मॉनिटरिंग को और मजबूत कर रहे हैं।
वन विभाग ने ग्रामीणों को आगाह किया है कि वे हाथियों के करीब जाने या उन्हें उकसाने की कोशिश न करें। रात के समय खेतों की रखवाली करते समय समूहों में रहें और तेज रोशनी व शोर का सीमित प्रयोग करें। विभाग द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी गई है ताकि हाथियों की लोकेशन को ट्रैक कर उन्हें सुरक्षित रूप से गहरे जंगल में वापस भेजा जा सके।

