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मेरठ में जागृति विहार एक्सटेंशन में सफर हो रहा असुरक्षित, आए दिन हो रहे हादसे

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– नाले में गिरी कार, स्ट्रीट लाइट, बाउंड्री वॉल बड़ी वजह।

शारदा रिपोर्टर मेरठ। मेडिकल थाना क्षेत्र के जागृति विहार एक्सटेंशन में गुरुवार को एक गाड़ी नाले में जा गिरी। कार में तीन लोग सवार थे जो किसी तरह बाहर निकल आए। गनीमत रही कि कोई हताहत नहीं हुआ। हादसे वाली जगह का निरीक्षण किया तो पता चला कि यहां आए दिन ऐसे हादसे हो रहे हैं। ना तो आवास एवं विकास परिषद ही ध्यान देता है और ना ही पुलिस की सख्ती ही यहां दिखाई देती है। जागृति विहार एक्सटेंशन में नाले के एक तरफ साउथ एक्स है तो दूसरी ओर वाला रास्ता कीर्ति पैलेस पुलिस चौकी को जाता है। 29 जनवरी की सुबह एक सफेद रंग की एडठ कार कीर्ति पैलेस चौकी की तरफ से आगे बढ़ी। अचानक कार अनियंत्रित हुई और नाले के किनारे बनी एक झोपड़ी को तोड़ते हुए करीब 15 फुट नीचे नाले में जा गिरी।

 

 

कार में एक युवती के अलावा दो पुरुष मौजूद थे। किसी तरह तीनों बाहर निकले और खुद को बचाया। बाद में क्रेन की मदद से कार को निकाला जा सका। कार में मौजूद लोगों की किस्मत अच्छी ही कहेंगे कि नाला गंदगी से भरा हुआ था। जैसे ही कार नीचे गिरी, वह कूड़े पर अटक गई। इसी के चलते अंदर मौजूद लोगों को दरवाजा खोलने का मौका मिल गया और तीनों बारी बारी बाहर निकल आए। लोगों का कहना है कि अगर कार नाले में चली जाती तो दरवाजा नहीं खुल पाता। इसमें जान भी जा सकती थी।

एक्सटेंशन बना ड्राइविंग स्कूल: एक समय था, जब विक्टोरियापार्क जैसे मैदान में लोग कार चलाना सीखते थे। अब वहां चार दिवारी होने के बाद दरवाजे लग चुके हैं। इसके बाद लोगों ने जागृति विहार एक्सटेंशन का रूख किया है। काफी दूर तक जागृति विहार एक्सटेंशन फैला है। सड़क बनी हुई हैं, जिस कारण अब लोग यहां आकर कार चलाना सीखते हैं।

सुरक्षा के लिहाज से सफर जोखिम भरा: सुरक्षा के लिहाज से देखें तो जागृति विहार एक्सटेंशन का सफर जोखिम भरा है। इस हादसे वाले नाले की ही बात करें तो यहां दोनों तरफ बाउंड्री वाल के नाम पर खानापूर्ति की गई है। दीवार ना होने के कारण अक्सर यहां कोई ना कोई हादसा होता रहता है। कुछ एक हिस्से में दीवार बनी भी थी तो वह ध्वस्त हो चुकी है।

रात होते ही छा जाता है अंधेरा

जागृति विहार एक्सटेंशन के चारों ओर आबादी बढ़ती जा रही है। क्षेत्रीय निवासी सुशील कुमार पटेल का कहना है कि अब तो लोग लोहिया नगर व हापुड़ तक का सफर भी इसी तरफ से करने लगे हैं। शाम होते ही यहां अंधेरा पसर जाता है, जिसके बाद सफर भी भगवान भरोसा रह जाता है। यहां पथ प्रकाश की व्यवस्था नहीं है। खंभे सालों पहले लग गए थे लेकिन उन पर लाइटें नहीं लगीं। कुछ खंभे ऐसे हैं, जिन पर एक बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान कुछ लाइट लगाई गई थीं लेकिन वह भी अब खराब हो चुकी हैं।

टहलने आने वाले भी दहशत में

जागृति विहार एक्सटेंशन में काफी लोग मोर्निंग व इवनिंग वॉक के लिए भी आते हैं। सरायकाजी निवासी सुरेंद्र कुमार बताते हैं कि इस हादसे की वजह नाले के किनारे दीवार ना होना है। अगर दीवार होती तो वह कार रुक जाती। दीवार ना होने के कारण वह आगे बढ़ती चली गई। जबकि रफ्तार ज्यादा तेज नहीं थी।

 

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