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Wednesday, January 28, 2026
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Cold wave in Meerut: बारिश के साथ कई जगह गिरे ओले, बढ़ी ठंड

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– पारा 6 डिग्री पहुंचा, आज से मौसम साफ रहने की संभावना, चलेगी शीतलहर।

शारदा रिपोर्टर मेरठ। मौसम ने अचानक करवट ली। कल सुबह जहां हल्की धूप दिखाई दी, वहीं करीब 11 बजे आसमान में काले बादल छा गए और बारिश शुरू हो गई। बारिश रुक-रुक कर देर रात तक होती रही, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही शहर के कुछ इलाकों में ओलावृष्टि भी हुई।

 

 

मौसम विभाग के अनुसार, बारिश और तेज हवाओं के चलते दिन के तापमान में 6.7 डिग्री सेल्सियस की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की मौसम वेधशाला के मुताबिक मंगलवार को अधिकतम तापमान 14.7 डिग्री सेल्सियस, जबकि न्यूनतम तापमान 7.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

यदि बारिश की बात करें तो मंगलवार को 10 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि इससे पहले 23 जनवरी को 15 मिमी बारिश हुई थी। इस प्रकार जनवरी माह में अब तक कुल 25 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है। मौसम विभाग ने बुधवार को भी बारिश की संभावना जताई है, जिससे शीतलहर का असर और अधिक बढ़ सकता है।

बारिश और सर्द हवाओं के कारण सुबह और शाम के समय ठंड अधिक महसूस की जा रही है। लोग स्वेटर, जैकेट और कंबलों का सहारा लेने को मजबूर हैं। बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों के लिए मौसम और भी मुश्किल बन गया है।

भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान मोदीपुरम के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एम शमीम के अनुसार आने वाले 24 घंटे तक ठंड और बारिश का यह सिलसिला जारी रह सकता है। तापमान में और गिरावट की संभावना है, जिससे शीतलहर का प्रभाव तेज हो सकता है। लोगों को सतर्क रहने और ठंड से बचाव की सलाह दी गई है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह बारिश फसलों के लिए मिली जुली साबित होगी। कृषि विवि के मौसम वैज्ञानिक डॉ. आरएस सेंगर ने बताया कि गेहूं, सरसों, आलू और सब्जियों की फसलों के लिए यह बारिश लाभकारी है और प्राकृतिक सिंचाई का काम करेगी।

वहीं, भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एम शमीम ने कहा कि पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से ओलावृष्टि हुई है, जो जनवरी के अंत में सामान्य नहीं है। अधिक ओलावृष्टि होने पर फसलों को नुकसान भी पहुंच सकता है।

प्रदूषण में आई भारी गिरावट, हवा हुई साफ

बारिश के चलते जहां जनजीवन प्रभावित हुआ है, वहीं प्रदूषण स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। हवा में जमी धूल और प्रदूषक तत्व धुलने से वायु गुणवत्ता बेहतर हुई है, जिससे लोगों को लंबे समय बाद साफ हवा में सांस लेने की राहत मिली है।

 

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