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Saturday, January 10, 2026
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HomeWorld Newsईरान में बगावत की आग !

ईरान में बगावत की आग !

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ईरान। महंगाई, बेरोज़गारी और दमन के खिलाफ विरोध उग्र हो गया है, 100 शहरों में प्रदर्शन, 60+ मौतें और इंटरनेट बंद के हालात है, 31 में से 26 प्रांतों में हालात बेकाबू हैं। लोग खामेनेई के खिलाफ नारे लगा रहे हैं, जबकि शासन सत्ता बचाने में जुटा है। आंदोलन अब सिस्टम बदलने की लड़ाई बन चुका है, तख्तापलट की आशंका भी बनी हुई है।

ईरान इस वक्त इतिहास के सबसे खतरनाक मोड़ पर खड़ा है। महंगाई, बेरोजगारी और दमन के खिलाफ सुलग रही चिंगारी अब आग बन चुकी है। तेहरान से मशहद तक, करमानशाह से रश्त तक कम से कम 100 शहरों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग सड़कों पर उतरे हुए हैं. इन प्रदर्शनों में अब तक 60 से ज़्यादा मौतें हुई हैं।

 

 

ईरान के 31 में से 26 प्रांतों में हालात बेकाबू हैं। महिलाएं, युवा, मजदूर सब सड़कों पर हैं। नारे गूंज रहे हैं, ‘खामेनेई मुर्दाबाद’, ‘शाह जिंदाबाद’। लेकिन दूसरी तरफ है, ईरान की सबसे ताकतवर कुर्सी। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की कुर्सी। खामेनेई किसी भी कीमत पर सत्ता छोड़ने को तैयार नहीं हैं।

तेहरान की सड़कों पर जली हुई गाड़ियां, सरकारी इमारतों पर हमले साफ देखे जा सकते हैं। सीसीटीवी उखाड़े जा रहे हैं और कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों को घेर कर पीट दिया है। उत्तर ईरान में गवर्नर का हेडक्वार्टर जला दिया गया। खामेनेई के गृहनगर मशहद में हजारों लोग अमेरिका से मदद की गुहार लगाते दिखे।

ईरान ने चौथे बड़े शहर कराज का सिटी हॉल जला दिया गया है। भीषण प्रदर्शनों का असर इस कदर हावी है कि सरकार को स्टारलिंक और जीपीएस सिग्नल भी जाम करने पड़े हैं।

ईरान की स्टेट मीडिया आमतौर पर सच्चाई छुपाती रही है, लेकिन इस बार इंटरनेट बंद होने के बावजूद वीडियो और तस्वीरें दुनिया के सामने हैं। यही वजह है कि अब गृहयुद्ध और तख्तापलट जैसे शब्द खुलेआम बोले जा रहे हैं।

इसी उथल-पुथल के बीच ख़ामेनेई कैमरे के सामने आए और सीधे-सीधे डोनाल्ड ट्रंप पर हमला बोल दिया। खामेनेई बोले, ‘कुछ लोग ट्रंप को खुश करने के लिए अपना ही देश जला रहे हैं। उसके हाथ हजारों ईरानियों के खून से सने हैं।’

दुनिया की नजरें ईरान पर: ईरान ने संयुक्त राष्ट्र को चिट्ठी लिखकर अमेरिका को चेतावनी दी है कि हमले की स्थिति में आत्मरक्षा का पूरा हक इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं, इजराइल का कहना है ईरान में जनता का गुस्सा असली है, लेकिन रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और बसीज मिलिशिया अब भी बेहद ताकतवर हैं। यानी तख्तापलट आसान नहीं, लेकिन नामुमकिन भी नहीं है।

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